बिना शनि की स्थिति जानें देखे कुंडली और हाथ की रेखाएं, ये है तरीका

आपको पता ही होगा शनिदेव एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनके क्रोध से इंसान तो क्या देवता भी कांपते हैं। शनि को यम, काल, दु:ख, दरिद्र और मंद कहा जाता है। बता दे, शनि देव, भगवान सूर्य तथा छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं। सूर्य के अन्य पुत्रों की अपेक्षा शनि शुरू से ही विपरीत स्वभाव के थे। इनकी दृष्टि में जो क्रूरता है, वह इनकी पत्नी के श्राप के कारण है। ब्रह्म पुराण में इस शाप की कथा बताई गई है। शनि देव को न्‍याय का देवता माना जाता है। बहुत से लोग उनसे डरते हैं मगर वह ऐसे देवता हैं जो सभी के कर्मों का फल देते हैं।

शनि ग्रह भगवान शनिदेव को दर्शाता है और भारतीय ज्योतिष में नवग्रह के नाम से जाने वाले सभी स्वर्गीय देवताओं में से एक है। सभी ग्रहों की अपनी अलग अलग विशेषता होती हैं। उसके लक्षण भी होते हैं या तो अच्छे, या तो बुरे और इन लक्षणों को समझकर हम उस व्यक्ति के ग्रहों को जान सकते हैं। इसके लिए व्यक्ति के स्वभाव और आदतों पर ध्यान देना होगा। शनि के लक्षण बहुत साफ होते हैं, जिसको पहचानना सरल होता है।

इस तरह जाने शनि का अशुभ होना

  • व्यक्ति कठोर वाणी और स्वभाव का होता है।
  • व्यक्ति के बाल रूखे होते हैं।
  • व्यक्ति लापरवाह और कामचोर स्वभाव का होता है, काम टालता रहता है।
  • आम तौर पर जीवन में किसी बड़ी घटना के बाद जीवन में बदलाव आ जाता है।
  • जीवन में निम्न कर्म तथा गलत कार्य में संलग्न रहता है।
  • कदम कदम पर संघर्ष का सामना करना पड़ता है।
  • एक स्थिति में जीवन में अकेलापन सा महसूस होता है।

इस तरह जाने शनि का शुभ होना

  • व्यक्ति लम्बा और दुबला पतला होता है।
  • व्यक्ति के बाल घने होते हैं।
  • व्यक्ति अनुशासित और कर्मठ होता है। खूब परिश्रम से आगे बढ़ जाता है।
  • आम तौर पर जीवन के मध्य भाग में अध्यात्मिक भी हो जाता है।
  • कानून,परिवहन या अध्यात्म से सम्बन्ध रखता है।
  • विलम्ब से ही सही पर खूब धन प्राप्त करता है।

ऐसे जाने वर्तमान में शनि शुभ परिणाम नहीं दे रहा है

  • घरों में सीलन आने लगे।
  • बिना कारण चोट लगने लगे।
  • हड्डियों में दर्द होने लगे।
  • बाल जरूरत से ज्यादा झड़ने लगें।

अगर शनि अशुभ हो तो करें ये उपाय

  • आचरण और आहार व्यवहार शुद्ध रखना चाहिए।
  • स्वक्छ्ता और धर्म का ठीक तरीके से पालन करना चाहिए।
  • भगवान शिव की या भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए।
  • देर तक सोने से और देर रात तक जागने से बचना चाहिए।
  • हल्के नीले रंग के वस्त्रों का प्रयोग करें।
  • संध्याकाळ में शनि के मन्त्रों का जप अवश्य करें।
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