बिहार का नेपाल से रोटी बेटी ही नहीं, पानी, नदी और बाढ़ से भी है रिश्ता

पटना: बिहार का नेपाल के साथ रोटी और बेटी के साथ साथ पानी, नदी और बाढ़ का भी रिश्ता है। यह रिश्ता भी खासकर बिहार के सीमावर्ती जिले कोसी समेत सीमांचल और उत्तर बिहार के जिलों के साथ गहरा है। दरअसल बिहार में बाढ़ आने की एक बड़ी वजह नेपाल भी है। नेपाल के तराई और जल संग्रह वाले इलाके और बिहार में भारी बारिश की वजह से उत्तर बिहार और मिथिलांचल समेत कोसी और सीमांचल की नदियों में बाढ़ आ जाती है। और इसका खामियाजा लगभग हर साल बिहार की जनता और खासकर सीमावर्ती इलाके और इनसे सटे जिले को भुगतना पड़ता है।

गंगा नदी के तटवती इलाकों में बाढ़ का कहर
रही सही कसर पश्चिम बंगाल में फरक्का बांध से पूरी हो जाती है। फरक्का की सिल्ट से हर साल गंगा नदी की गहराई कम होती जाती है नतीजनत प्रदेश की राजधानी पटना समेत भागलपुर और मुंगेर समेत गंगा नदी के तटवती इलाकों को बाढ़ का कहर झेलना पड़ता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रदेश में आई बाढ़ के लिए हर साल फरक्का बैराज को कसूरवार ठहराते आ रहे हैं और इसे तोड़ने की मांग भी वो प्रधानमंत्री से कई बार कर चुके हैं।

नेपाल से सटे बिहार के 7 जिले बाढ़ से परेशान
बिहार में नेपाल से सटे 7 जिले सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी और इनसे सटे जिलों में हर साल बाढ़ आती है। कोसी क्षेत्र साल 2008 में आई भीषण बाढ़ की विभिषिका झेल चुका है। कोसी के रौद्र रूप के आगे कोसी और सीमांचल का इलाका बेबस बना हुआ था।

दस जिलों के 64 प्रखंडों की 426 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित
साल 2020 में आई बाढ़ से राज्य के दस जिलों के 64 प्रखंडों की 426 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हो गई हैं। बाढ़ से इन पंचायतों की सात लाख 65 हजार आबादी प्रभावित हैं। नेपाल के वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़े गए साढ़े चार लाख क्यूसेक पानी की वजह से गोपालगंज में गंडक कहर मचा रही है। गुरुवार को गंडक नदी बेकाबू हो गई। जिले में सारण मुख्य तटबंध दो जगहों पर टूट गया है। सारण मुख्य तटबंध टूटने से पहले बरौली के सिकटिया गांव के समीप रिंग बांध टूट गया। जिससे 40 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। सारण तटबंध टूटने से देवापुर के समीप एनएच 28 पर बाढ़ का पानी बह रहा है। मची अफरातफरी के बीच यहां भी बड़ी संख्या में लोग पलायन कर रहे हैं।

सामुदायिक भवन, स्कूल,बांध व एनएच पर शरण
उत्तर बिहार में बागमती, गंडक, बूढ़ी गंडक सहित अधिकांश छोटी पहाड़ी नदियां कई जगहों पर लाल निशान से ऊपर बह रही हैं। इसकी वजह से बाढ़ का पानी घरों में घुसने से हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं। लोगों ने सामुदायिक भवन, स्कूल,बांध व एनएच पर शरण ले रखा है। पश्चिम चंपारण के मझौलिया में सिकरहना में जमींदारी बांध टूट गया। इससे इलाके ढ़ाई हजार परिवार बाढ़ के खतरों से घिर गये हैं। सैकड़ों एकड़ में लगी फसलें डूब गई हैं। पूर्वी चंपारण के रामगढ़वा में पखनहिया पंचायत के कलिकापुर में तिलावे नदी पर मनरेगा से बना बांध करीब बीस फीट में टूट गया। बांध टूटने से सैकड़ों एकड़ में लगी फसल डूब चुकी है। जिले के आठ प्रखंडों में बाढ़ तबाही मचा रही है। अरेराज व सुगौली में तटबंध पर भारी दबाव बना है।

बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप
वहीं मुजफ्फरपुर के पारू व साहेबगंज की लगभग दो दर्जन पंचायत के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है, दरभंगा में सिंहवाड़ा प्रखंड के अतरबेल -भरवारड़ा पथ पर रामपुरा में बाढ़ का पानी चढ़ गया है। केवटी में भी रनवे- रैयाम मार्ग पर बाढ़ का पानी चढ़ गया। रैयाम पावर सबस्टेशन में पानी घुसने के बाद बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। दरभंगा में बागमती के अलावा सगुना का पानी भी तेजी से फैला है। उधर, बाजपट्टी-सीतामढ़ी मुख्य पथ में पेट्रोल पम्प और गेनपुर गांव के मध्य पानी के तेज बहाव से आवागमन प्रभावित हो गया है।

ट्रेनों का परिचालन अगले आदेश तक स्थगित
वहीं अब रेलवे ने भी समस्तीपुर दरभंगा रेल खंड पर ट्रेनों का परिचालन अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। सीनियर डीसीएम सह मीडिया प्रभारी सरस्वतीचंद्र ने बताया कि हायाघाट के पास बागमती नदी स्थित रेलवे पुल संख्या 16 के गार्डर को पानी ने छू दिया है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए परिचालन को स्थगित किया गया है। वहीं दरभंगा से खुलने वाली ट्रेनों को दरभंगा, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर के रास्ते चलाया गया है।

कोसी के जलस्तर में कमी, बागमती खतरे के निशान से ऊपर
हालांकि अभी तक कोसी, सीमांचल में बाढ़ की विभिषिका पूरी तरह से नजर नहीं आ रही है। गुरुवार से नदियों के जलस्तर में कमी आने लगी है। जबकि, पूर्वी बिहार के खगड़िया में पिछले 24 घंटे में बागमती नदी के जलस्तर में 36 सेंटीमीटर और कोसी में 17 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। दोनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं बीएन तटबंध में रिसाव शुरू होते ही जल संसाधन विभाग ने बचाव का कार्य शुरू कर दिया है। गंगा का जलस्तर स्थिर है।

कोसी बराज से 1 लाख 72 हजार क्यूसेक डिस्चार्ज
दूसरी तरफ, कोसी बराज से गुरुवार को दोपहर 2 बजे 1 लाख 72 हजार क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया। सुपौल व सहरसा के बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी तेजी से निकलने लगा है। हालांकि, सहरसा का सलखुआ प्रखंड और मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड में पानी बढ़ने से सैकड़ों परिवार घर छोड़कर सुरक्षित ठिकाने का रुख कर रहे हैं। अररिया व किशनगंज जिले में जलस्तर घटते ही कटाव तेजी से होने लगा है। कटिहार में केवल महानंदा के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। बाढ़ प्रमंडल विभाग के मुताबिक सभी तटबंध सुरक्षित हैं।

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