बिहार के डेढ़ दर्जन शेल्टर होमों में अमानवीयता की इंतहा, टीआईएसएस की रिपोर्ट में खुलासा

पटना: बिहार में चल रहे डेढ़ दर्जन शेल्टर होमों में पह रही लड़कियों के साथ अमानवीयता की हद तक अत्याचार हो रहा है। यहां यौन, मानसिक या शारीरिक शोषण की बात आई है। मुजफ्फपुर बालिका गृह रेप कांड के बाद उसके मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर की गिरफ्तारी के बाद टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (टीआईएसएस) ने बड़ा खुलासा किया है। टीआईएसएस की सोशल ऑडिट रिपोर्ट ने राज्यभर में ऐसे ही 14 शेल्टर होम की पहचान की है। इनमें कई में नाबालिगों के गर्भवती हाने की खबर भी है, यहां तक कि इनमें कुछ के बच्चे भी हैं।

टीआईएसएस की रिपोर्ट के मुताबिक 35 जिलों के 110 शेल्टर होम, शॉर्ट स्टे होम के ऑडिट का जिक्र है। सूत्रों का कहना है कि सरकार रिपोर्ट जल्द ही पब्लिक के सामने ला सकती है। टीआईएसएस की रिपोर्ट में 15 सेंटरों में यौन या शारीरिक शोषण की बात कही गई है, जिनमें से एक को बृजेश ठाकुर चलाता था। इन 15 सेंटरों का जिक्र एक विशेष शीर्षक के साथ किया गया है गंभीर चिंता- इन सेंटरों पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। ठाकुर का शेल्टर होम, जिसके उसके एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति के जरिए चलाया जाता है, के बारे में रिपोर्ट में लिखा है, लड़कियों के साथ यौन शोषण के मामलों में सबसे आगे है।

सभी कम उम्र की लड़कियों और पिछड़े वर्ग से आने वाली लड़कियों के साथ सजा और अनुशासन के नाम पर यौन शोषण किया जाता था। लड़कियों ने कहा है कि पुरुष स्टाफ उनकी नियमित तौर पर पिटाई भी करते थे। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन 15 सेंटरों में पटना में एकार्द, मोतिहारी (सखी), कैमूर (ग्राम स्वराज सेवा संस्थान), माधेपुरा, (महिला चेतना विकास मंडल) और मुंगेर (नॉवल्टी वेलफेयर सोसायटी। अन्य शेल्टर होम सरकार की देखरेख में संचालित अररिया सेंटर, मुजफ्फरपुर का ओम साई फाउंडेशन, पटना का डोन बॉस्को टेक सोसायटी द्वारा संचालित कौशल कुटीर और गया मेत्ता बुद्धा ट्रस्ट द्वारा संचालित सेवा कुटीर हैं।

इनमें लड़कों के शेल्टर होम में निर्देश द्वारा संचालित मोतिहारी सेंटर, भागलपुर में रूपम प्रगति समाज समिति, मुंगेर में पन्ना और गया में डीओआरडी हैं। इसके अलावा पटना के नारी गुंजन, मधुबनी के आरवीईएसके और कैमूर के ज्ञान भारती को गंभीर चिंता वाली श्रेणी में रखा गया है। शेल्टर होम की हालत की बात करें तो लड़कों के शेल्टर होम में उन्हें रात के खाने के बाद उनके वॉर्ड में बंद कर दिया जाता है। उनके पास रात भर शौचालय जैसी सुविधा भी नहीं होती। रिपोर्ट तैयार करने वालों का कहना है कि उन्हें मौके से पेशाब की भरी हुई बोतलें भी मिली हैं।

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