बिहार में 2 हजार से ज्यादा दलितों ने बौद्धधर्म अपनाया

दिल्ली ब्यूरो: बदलती राजनीतिक व्यवस्था में बिहार के सामंती समाज में एक नई लहार दिख रही है। बिहार बहुत दिनों बाद धर्मांतरण की तरफ बढ़ता जा रहा है। बिहार के छपरा यानी सारण जिले से खबर आ रही है कि समाज में फैली कुरीतियों और छुआछूत से तंग आकर दो हजार से ज्यादा महिला पुरुषों ने हिन्दू धर्म से अलग होकर बौद्ध धर्म अपना लिया है। बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर के धम्म चक्क परिवर्तन दिवस 14 अक्टूबर के अवसर पर सारण के हजारों महिला और पुरूष हिन्दुओं ने बौद्ध धर्म को अपना लिया।

बता दें कि सारण मुख्यालय स्थित जिला स्कूल परिसर में भारतीय बौद्ध महासभा, आंबेडकर रविदास महासंघ और अंबेडकर परिगणित कल्याण संघ के तत्वाधान में महात्मा बुद्ध की देशना एवं धम्म दीक्षा समारोह आयोजित की गई थी। इसमें जिले व आसपास के लगभग दो हजार से ज्यादा दलित समाज के लोगों ने धम्म की दीक्षा प्राप्त कर धार्मान्तरण कर लिया हैं।

धर्म परिवर्तन की दीक्षा नागपुर से आये धम्म गुरू भिखुनी विजया मैतरिया ने दी। शपथ ग्रहण लेने वालों ने बाबा साहब एवं महात्मा बुद्ध के पद चिन्हों पर चलने का संकल्प लिया है। बौद्ध भिखुनी ने कहा कि महात्मा बुद्ध के बताये मार्ग पर चलकर ही समाज में फैले असमानता, वर्ण व्यवस्था, ढ़ोंग-पाखंड, बली प्रथा, अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों को दूर किया जा सकता है। बुद्ध की देशना सह दीक्षा समारोह में धर्मान्तरण करने वाले बाबा साहब के अनुयायियों ने कहा कि समाज में व्याप्त वर्ण व्यवस्था एवं कुरीतियों को समाप्त करने को लेकर व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके अलावे जिले के विभिन्न प्रखंडों व जिला स्तर पर बुद्ध की दीक्षा समारोह आयोजित किया जाएगा। ताकि समाज में फैले अंधविश्वास, असमानता, वर्ण व्यवस्था, ढ़ोंग-पाखंड, बली प्रथा, एवं सामाजिक कुरीतियों को दूर किया जा सके।

सदर प्रखंड अंतर्गत कुतुबपुर गांव निवासी सह अम्बेडकर रविदास महासंघ के प्रधान महासचिव रामलाल राम ने पूरे परिवार के साथ धर्मान्तरण किया है। उन्होंने कहा कि समाज में फैले वर्ण व्यवस्था, भेदभाव, अंधविश्वास और सामंतवाद के कारण पूरे परिवार के साथ धर्मान्तरण किया है। वहीं, रामलाल राम ने कहा कि वर्तमान परिवेश में समाज में असमानता की खाई और अधिक बढ़ गई है। खास कर सामान्य वर्ग के लोग अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के साथ काफी भेदभाव कर रहे हैं। इसी कारण हमलोगों ने बोद्ध धर्म अपनाया है।

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