बीजेपी और कांग्रेस के लिए नाक का सवाल है उपसभापति का चुनाव

दिल्ली ब्यूरो: संसद में नाक की लड़ाई में मामला फस गया है। राज्यसभा उपसभापति की कुर्सी पर कौन बैठेगा इसको लेकर पक्ष -विपक्ष के बीच जिस तरह के खेल चल रहे हैं ,कभी देखा नहीं गया। इस लड़ाई को नाक की लड़ाई से जोड़ लिया है बीजेपी और कांग्रेस वाले। बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह किसी भी सूरत में हार मानने को तैयार नहीं है। उनकी समझ है कि जब आजतक उनकी रणनीति और कूटनीति का वार खाली नहीं गया तो इस बार विपक्ष की हैसियत क्या है।उधर विपक्ष वाले भी भिड़े हुए हैं। कांग्रेस लम्बे समय से इस कुर्सी पर विराजवान थे इस बार कैसे छोड़ेंगे। दोनों तरफ से पास फेके जा रहे हैं और घातक दलों को अपने खेमे में लाने की कोशिश कर रहे हैं।

संसद का शीतकालीन सत्र 10 अगस्त तक प्रस्तावित है और इससे ठीक एक दिन पहले सभापति एम वेंकैया नायडू ने उपसभापति के चुनाव की घोषणा कर दी है। सही मायने में यह चुनाव मोदी सरकार के लिए नाक का सवाल है। एनडीए पहले ही राज्यसभा की पॉवरफुल लोक लेखा समिति में एक हार का सामना कर चुका है। इस चुनाव में एनडीए के प्रत्याशी जदयू के हरिबंश नारायण सिंह को विपक्षी दलों के प्रत्याशी सीएम रमेश से हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में जहां एक बार फिर उपसभापति के चुनाव में एनडीए के प्रत्याशी की हार तय मानी जा रही है, वहीं सत्ता पक्ष इस पद को हासिल करने पर पूरा जोर लगा रहा है।

एनडीए की तरफ से जदयू के हरिबंश नारायण सिंह को उपसभापति पद के लिए फिर मैदान में उतारने की संभावना है। उनका नाम चर्चा में पहले स्थान पर है। कल नामांकन का आखिरी दिन है और समझा जा रहा है कि आज शाम तक नाम फाइनल हो जाएगा। भाजपा संसदीय दल की बैठक अब समाप्त हो चुकी है और बैठक में तमाम तरह की रणनीति बनी है कि चाहे जैसे भी इस बार मात नहीं होना है।

तृणमूल कांग्रेस के सुखेन्दु शेखर राय ने पहले ही विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार उतारने की वकालत कर दी है। कांग्रेस पार्टी भी चाहती है कि कोई महत्वाकांक्षा न पालते हुए पहले उपसभापति के पद पर विपक्ष के उम्मीदवार को विजय हासिल हो। ऐसे में अभी डीएमके के तिरुचि शिवा और एनसीपी की वंदना शिवा का नाम सबसे आगे हैं। सोमवार को उपसभापति के प्रत्याशी को लेकर संसद भवन में गुलाम नबी आजाद ने विपक्ष के नेताओं से मंत्रणाभी की थी। उम्मीद है कि मंगलवार को विपक्ष भी अपने उम्मीदवार का नाम फाइनल करके उससे नामांकन दाखिल करा देगा। बता दें कि केन्द्र सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं है।

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