बीजेपी का राष्ट्रवाद! त्रिपुरा में बीजेपी से साथ आईपीएफटी की सरकार

दिल्ली ब्यूरो: राष्ट्रवाद या फिर अवसरवाद ! सरकार बनाने के लिए किसी भी तरह की समझौता जायज। यही है आज की राजनीति। राष्ट्रवाद के नाम पर बड़े बड़े लेक्चर देती फिरती बीजेपी अब त्रिपुरा में अलगाववादी पार्टी आईपीएफटी से गठबंधन कर सरकार कहले जा रही है। पहले बीजेपी इस पार्टी को हमेशा निशाने पर रखती थी लेकिन अब उसके साथ प्यार जाग गया है। ऐसे में त्रिपुरा में राष्ट्रवाद का नारा लगाने वाली बीजेपी की कलई खुल गयी है। बीजेपी की यह राजनीतिक महत्वकांक्षा बहुत कुछ कहती है।

ऐसा नहीं है कि बीजेपी कोई पहली बार किसी अलगाववादी संगठनों के साथ मिलकर सरकार चलाने जा रही है। इससे पहले भी वह जम्मू और कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार चला रही है। आप को बता दें कि पीडीपी हमेशा से अलगावादियों के लिए सॉफ्ट कार्नर रखती है और अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन भी करती है। इसी तरह अब बीजेपी त्रिपुरा में भी अलगाववादी संगठन आईपीएफटी के साथ मिलकर सरकार चलाने वाली है। त्रिपुरा में कुल 60 विधानसभा सीट है, जिसमें से 51 पर बीजेपी ने चुनाव लड़ा और नौ पर उसकी सहयोगी पार्टी आईपीएफटी ने चुनाव लड़ा।

बीजेपी 51 में से 35 जीत गई, वही आईपीएफटी ने नौ में से आठ सीटों पर जीत दर्ज की है। चुनाव परिणाम आने के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने भाषण में भी कहा कि वह अपनी सहयोगी पार्टी आईपीएफटी को सरकार में जगह देंगे। बता दें कि आईपीएफटी का इतिहास रक्तरंजित रहा है। आईपीएफटी टिप्परलैंड नाम के अलग राज्य की मांग करती रही है। इस संगठन को सशस्त्र राष्ट्रीय लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) का भी समर्थन प्राप्त रहा है। देखने वाली बात होगी कि आईपीएफटी आगे की क्या रणनीति अपनाती है। उसकी टिप्परलैंड राज्य की मांग अभी कायम है या फिर राष्ट्रवाद में समाहित हो चुकी है।

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