बीजेपी के दलित प्रेम में दलितों पर जुर्म के फड़फड़ाते पन्ने

अखिलेश अखिल


राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के हालिया आंकड़े बहुत कुछ बता रहे हैं। इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि बीजेपी शासित राज्यों में दलितों पर सबसे ज्यादा जुर्म हुए हैं और बलात्कार की घटनाएं भी। यह बात और है कि इन आंकड़ों के विश्लेषण से कई तरह की आपराधिक मामले उभरते हैं लेकिन दलित समुदायों पर जिस तरह से हमले और अत्याचार हुए हैं ,चौकाने वाले हैं। आपको बता दें कि एनसीआरबी ने अभी हाल में ही 2016 के आपराधिक आंकड़ों को जारी किया है। क्राइम इन इंडिया के नाम से जारी इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि जिस तरह से 2015 की रिपोर्ट में बीजेपी शासित राज्यों में दलितों पर अत्याचार के मामले सबसे अधिक थे ,ठीक उसी तरह 2016 के आंकड़ों में भी वैसा ही हाल है। कोई बदलाव नहीं हुए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक़, भाजपा शासित राज्य गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, गोवा तथा झारखण्ड में दलित उत्पीड़न के अपराध दूसरे राज्यों की अपेक्षा काफी अधिक हैं। यह स्थिति मोदी जी की दलितों के बारे में दिखाई गयी सहानुभूति तथा उनके दलित प्रेम की पोल खोलती है। इनके इलावा कुछ अन्य राज्य जैसे उड़ीसा, आन्ध्र प्रदेश, तेलन्गाना, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी दलितों की हालत ठीक नहीं है।

इस वर्ष दलितों पर कुल घटित अपराध की संख्या 40,801 है जो कि वर्ष 2015 की संख्या 38,670 से 2,131 अधिक है। इस प्रकार 2016 में पिछले वर्ष की अपेक्षा 5.5% की वृद्धि हुयी है। इस वर्ष प्रति एक लाख दलित आबादी पर घटित अपराध की राष्ट्रीय दर 20.3 रही है। इन अपराधों में दलित महिलाओं के शील भंग के कुल मामले 3,172 थे जो कि दलितों पर कुल घटित अपराध का 7.7% थे। इसी प्रकार बलात्कार के कुल मामले 2,541 थे जो कि कुल अपराध का 6.2% थे।

इसी प्रकार उक्त अवधि में जनजाति वर्ग के विरुद्ध 6,568 अपराध घटित हुए जो कि 2015 की अपेक्षा में 4.7 % अधिक थे। आपको बता दें कि जनजाति वर्ग की महिलाओं पर बलात्कार के 974 मामले घटित हुए जो कि उन पर घटित कुल अपराध का 14.8% हैं। उन पर शील भंग के 835 मामले हुए जो कुल अपराध का 12.7 % थे। इससे स्पष्ट है कि भाजपा राज में दलित महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं।

दलितों पर वर्ष 2016 में घटित अपराध की दृष्टि से भाजपा शासित राज्यों की स्थिति देखी जाये तो मध्य प्रदेश प्रथम स्थान पर है जिसमे 4,922 अपराध घटित हुए तथा अपराध की दर 43.4 रही जो कि राष्ट्रीय दर 20.3 से दुगनी है। इसी प्रकार राजस्थान दलित अपराध में देश में दूसरे नंबर पर है जहाँ 5,134 अपराध तथा उसकी दर 42.0 रही जो कि राष्ट्रीय दर (20.3) से दुगनी है। इसमें गोवा तीसरे स्थान पर है जहाँ अपराध दर 36.7 है। इसमें गुजरात 5वें स्थान पर है जहाँ अपराध दर 32.2 है जो कि राष्ट्रीय दर 20.3 से लगभग डेढ़ गुना है। इससे स्पष्ट है कि अधिकतर भाजपा शासित राज्यों में दलितों पर अपराध राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक हैं।

वर्ष 2016 के एनसीआरबी के आंकड़े दलितों के बारे में बहुत कुछ बताते हैं। अपराध की जितनी भी श्रेणी है सबमे सबसे ज्यादा उत्पीड़न दलितों पर ही हुए हैं। दलितों के बाद आदिवासी समाज सबसे ज्यादा उत्पीड़न के शिकार हुए हैं।

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