बीजेपी को नाथने के लिए 29 जनवरी को विपक्ष करेगा महामंथन

अखिलेश अखिल

अभी हाल में ही दो चैनलों दवारा अलग अलग एजेंसियों के जरिये कराय गए सर्वे रिपोर्ट से जहां बीजेपी सरकार और प्रधान मंत्री मोदी के प्रति जनता के मिजाज का पता चलने के बाद विपक्ष की राजनीति एक मंच पर आने को कुलबुला रही है। विपक्षी धरे लो लग रहा है कि समय रहते अगर एक जुट होकर चुनावी राजनीति शुरू की जाय तो बीजेपी की राजनीति को बांधा जा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह को देखकर अतिथि बने आसियान देश जहां भारत की ताकत ,विनम्रता और महानता को देख हतप्रभ थे वहीँ मुंबई में इसी दिन विपक्षी नेता संविधान बचाओ की रैली निकाल रहे थे। बड़ा ही अद्भुत नजारा था। दिल्ली में संविधान की गरिमा का उत्कृष्ट नजारा और मुंबई में संविधान बचाने का नारा। यह सब आगे की राजनीति का खेल है। संविधान बचाने के नाम पर राजनितिक गठबंधन की शुरुआत है।

मुंबई में हुयी रैली के बाद साफ़ हो गया है कि भाजपा के खिलाफ देश में विपक्ष ने एकजुट होना शुरू कर दिया है। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि विपक्षी दल 29 जनवरी को दिल्ली में बैठक करेंगे और भाजपा के खिलाफ आगे की लड़ाई पर विचार करेंगे। विपक्षी दलों ने ‘संविधान बचाओ’ मार्च भी निकाला। गणतंत्र दिवस के मौके पर निकली गई संविधान बचाओ रैली में पवार समेत माकपा नेता सीताराम येचुरी, शरद यादव, भाकपा के डी राजा, गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी, कांग्रेस के सुशील कुमार शिंदे और राज्य के अन्य कई नेताओं ने हिस्सा लिया। विपक्षी नेताओं की यह रैली मुंबई के डॉ बाबासाहेब अंबेडकर प्रतिमा से छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा (गेट वे ऑफ़ इंडिया) तक निकाली गई। इस रैली में बड़ी संख्य में लोगों ने हिस्सा लिया।

रैली में शामिल नेताओं ने पिछले दिनों हुई घटनाओं, खासकर फिल्म पद्मावत के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए संविधान को बचाने की ज़रूरत बताई। माना जा रहा है कि संविधान की रक्षा के बहाने आयोजित की गई रैली का असली उद्देश्य विपक्ष की ताकत का प्रदर्शन करना था। बता दें, कि शिवसेना पहले ही भाजपा से अलग होने का ऐलान कर चुकी है। पार्टी साफ कर चुकी है कि साल 2019 में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में वो भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताविक 29 जनवरी को दिल्ली में जो बैठक होने वाली है उसमे देश भर के विपक्षी नेताओं का जमावाड़ा होना माना जा रहा है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि अगर आज से ही विपक्ष एकजुट होकर जनता के बीच जाए तो बीजेपी की राजनीति को साधा जा सकता है और अगले चुनाव में उसे शिकस्त दिया जा सकता है।

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