बीजेपी पर चौतरफा हमला, यशवंत और शत्रुघ्न की कूटनीतिक तैयारी तो शरद देंगे नीतीश को चुनौती

अखिलेश अखिल

राजनीति में कोई किसी का अपना नहीं। और लगे हाथ कि कोई पराया भी नहीं। वक्त के साथ अपने पराये की पहचान बदल जाती है। इधर जब से यशवंत सिन्हा ने बीजेपी से अलग होने का ऐलान किया है तब से उनके निशाने पर सिर्फ बीजेपी है। सिन्हा हर हाल में बीजेपी को सत्ता से हटाने की तैयारी कर रहे है। सिन्हा का साथ दे रहे हैं बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा। बीजेपी को पल्लवित पुष्पित करने में दोनों नेताओं की भूमिका को कमतर नहीं माना जा सकता। लेकिन बीजेपी को वे ख़ाक में मिलाना चाह रहे हैं।

इस योजना को सफल करने के लिए वे कोई भी कुर्वानी करने को तैयार हैं। उधर बिहार की राजनिति के पारंगत और समाजवादी नेता शरद यादव अब नीतीश कुमार से बदला लेने को तैयार हैं। जब से शरद यादव ने अपनी नयी पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल का गठन किया है बिहार समेत कई राज्यों में समाजवादियों की एक नयी धारा बहने लागिओ है। शरद सबसे पहले बिहार में नीतीश को अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहे हैं। नीतीश को चुनौति देने के लिए शरद ने बिहार में ही अपनी पार्टी की पहली रैली करने जा रहे हैं। खेल यही है कि चुनाव में एनडीए की राजनीति को कुंद कर दिया जाय। लेकिन पहले यशवंत सिन्हा की राजनीति पर एक
नजर।

बीजेपी के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा और पार्टी से नाराज चल रहे सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पार्टी को सत्ता से बाहर करने की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक इस सिलसिले में इन दोनों नेताओं ने तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रमुख एम करुणानिधि और उपाध्यक्ष एमके स्टालिन से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के मुद्दे पर बातचीत करने के लिए यह बैठक की गई।बैठक के बाद स्टालिन ने मीडिया से बातचीत की है। उनके मुताबिक दोनों नेताओं ने उन्हें बताया कि भाजपा को रोकना जरूरी है और इसके लिए साथ मिलकर काम करना होगा। स्टालिन ने कहा कि वे उनकी बातों से सहमत हैं। वहीं, कांग्रेस से हाथ मिलाने की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी दलों के साथ आने का मकसद भाजपा को सत्ता से बाहर करना है। उन्होंने कहा, ‘हमने उनसे (दलों) बात की है जिनके साथ हमारा गठबंधन हो सकता है ताकि हमारा उद्देश्य पूरा हो सके। ’ स्टालिन ने बताया कि कुछ दिन पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के साथ हुई बैठक का मुद्दा भी यही था कि भाजपा को केंद्र से हटाने के लिए सभी को संगठित होना होगा।

स्टालिन की यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा और अन्य दलों के नेताओं से मुलाकात को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि तमिलनाडु में डीएमके की प्रमुख सहयोगी कांग्रेस है। खबर के मुताबिक स्टालिन का राव से मिलना और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रशंसा करना सियासी हलकों में बहस का मुद्दा बन गया है। नेता राज्य में कांग्रेस और डीएमके गठबंधन को लेकर सवाल करने लगे हैं। अब शरद यादव की बात। जनता दल- यूनाइटेड (जद-यू) से निष्कासित नेता शरद यादव अब अपनी इस पूर्व पार्टी को सीधी चुनौती देने वाले हैं। ख़बराें के मुताबिक उन्होंने जद-यू और उसके मौज़ूदा प्रमुख नीतीश कुमार के गढ़ बिहार में अपना पहला बड़ा शक्ति-प्रदर्शन करने का मंसूबा बांधा है। वे वहां 18 मई को एक बड़ी रैली करने वाले हैं।जानकारी के मुताविक शरद यादव की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित राष्ट्रीय जनता दल,समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और वाम दलों के नेताओं को भी बुलाया जा रहा है। कोशिश है कि इन पार्टियों के प्रतिनिधियों की मौज़ूदगी में यह रैली संयुक्त विपक्ष का महागठबंधननुमा शक्ति प्रदर्शन हो।

सूत्रों की मानें तो शरद यादव की नई-नवेली पार्टी- लोकतांत्रिक जनता दल (लोजद) मध्य प्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव लड़ने की भी तैयारी कर रही है। साथ ही साल के अंत तक बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान शुरू करने की भी योजना है। कोशिश यह है कि इस अभियान के जरिए पूरे देश में लगभग 10 लाख सदस्यों को पार्टी से जोड़ा जाए।

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