बेटे की खुदकुशी से हताश पिता ने भी दी जान

लखनऊ: राजाजीपुरम में छह दिन पहले परीक्षा में फेल होने पर बेटे ने आत्महत्या कर ली थी। इस घटना से क्षुब्ध पिता ने शनिवार को आत्महत्या कर ली। बेटे की मौत का सदमा सह न सके पिता ने टीन शेड की बल्ली में दुपट्टे का फंदा डालकर जीवनलीला समाप्त कर ली। उधर, बाजारखाला क्षेत्र में युवती और वजीरगंज व पीजीआई क्षेत्रों में भी दो लोगोें ने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। तालकटोरा क्षेत्र के राजाजीपुरम सेक्टर-12 स्थित रुकन्दीपुर निवासी टैम्पो चालक उमेश गुप्ता के बेटे आदर्श ने सोमवार को 11वीं में फेल हो जाने के पर विद्यालय से लौटने के बाद फांसी लगाकर जान दे दी थी।

बेटे की मौत का सदमा 6 दिन तक झेलने के बाद उमेश गुप्ता ने भी शनिवार को कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द कर छत में पड़े टीन शेड की बल्ली से दुपट्टे का फंदा डालकर फांसी लगा ली। उमेश की पत्नी रूची ने बताया कि बेटे की मौत के बाद रिश्तेदार घर पर थे। शुक्रवार को शांति पाठ के बाद सभी रिश्तेदार अपने घर चले गये थे। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे पत्नी बेटी अंकिता व दामाद नितिन श्रीवास्तव के साथ अमीनाबाद में किराये का कमरा देखने गयी थी। घर पर उमेश अकेले थे। शाम करीब 8 बजे मोहल्ले के लोगों ने पति की मौत की सूचना पुलिस व परिजनों को दी। उधर, वजीरगंज इलाके के 255/194 कुण्डरी रकाबगंज मोहल्ले में रहने वाले गोपाल मिश्रा (28) पुत्र स्व. रामशंकर ने कमरे में पंखे में साड़ी का फंदा डालकर जान दे दी।

उसकी पत्नी नेहा मायके गयी थी। गोपाल की पांच व ढाई साल की दो बेटियां हैं। इसी तरह ऐशबाग बाजारखाला निवासी सन्तोष वर्मा की बहन नताशा वर्मा (27) का हाथ 8 नवम्बर को हुए एक हादसे के दौरान काटना पड़ा था, इसके चलते वह गुमसुम रहती थी। शनिवार को भाई सन्तोष करीब 10 बजे अपने काम पर चले गये। भाभी राधा व नताशा घर में अकेली थी। इसी बीच नाश्ता करने के बाद बरामदे में बैठी थी। नताशा नहाने के लिए बरामदे के पीछे गयी और अमरूद के पेड़ पर फैली साड़ी का फंदा डालकर फांसी लगा ली। उधर, बाबूलाल (70) पत्नी छेदाना के साथ धोबी टोला कल्ली पश्चिम में रहते थे। वह पेशे से राजमिस्त्री थे और काफी समय से बीमार थे। उनकी चार बेटियां निर्मला, विद्यावती, रानी और गुड्डी हैं।

चारों का विवाह हो चुका है और वह अपने परिवार के साथ रहती हैं। गुड्डी का परिवार कल्ली पश्चिम में ही रहता है। गुड्डी का बेटा सुनील पीजीआई स्थित एक लॉज में काम करता है। सुनील ने बताया कि बाबूलाल चार दिन सिविल अस्पताल में भर्ती थे। 29 मार्च को घर आये थे। डाक्टर ने रीढ़ की हड्डी व फेफड़ों में कैंसर होना बताया था। तब से यह काफी दुखी थे। शनिवार सुबह उन्होंने अपने कमरे में दुपट्टे से पंखे के हुक से फंदा डालकर फांसी लगा ली। पड़ोसी श्रीराम ने देखा तो छेदाना को सूचना दी।

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