बेस्ट ऑप्शन है डिस्टेंस लर्निंग

कॉम्पिटीशन के इस दौर में डिस्टेंस लर्निंग बेस्ट ऑप्शन बनकर उभरा है। अगर कोई जॉब के साथ पढ़ाई करना चाहता है, तो उसके लिए डिस्टेंस लर्निंग बहुत अच्छा ऑप्शन है। दरअसल, डिस्टेंस लर्निंग एक ऐसा सिस्टम है, जिसमें स्टूडेंट्स को कॉलेज या इंस्टीट्यूट जाने की जरूरत नहीं होती। इसके अलावा डिस्टेंस लर्निंग के जरिए कम फीस में अच्छा कोर्स और हायर एजुकेशन किया जा सकता है।

दरअसल, डिस्टेंस एजुकेशन की लोकप्रियता के चलते सरकार ने इस काउंसिल की स्थापना 1985 के नेशनल ओपन युनिवर्सिटी एक्ट के तहत की थी। इसका काम देश भर की ओपन यूनिविॢसटी के साथ समन्वय करना होता है। इसके अलावा यह कोर्सेस की गुणवत्ता, सभी तक पहुंच, पाठ्यक्रम निर्माण में गहन वैज्ञानिक सोच, नई तकनीकों का प्रसार, अध्यापक ट्रेनिंग, फंड एलोकेशन जैसे कामों को भी सुनिश्चित करती है। डिस्टेंस एजुकेशन को युनिवर्सिटी एक्ट की धारा 16 में जगह दी गई है।

डिस्टेंस एजुकेशन के क्षेत्र में सबसे पॉपुलर नाम है इग्नू यानी इंदिरा गांधी ओपन युनिवर्सिटी। इसके 77 से ज्यादा एकेडमिक, प्रोफेशनल, वोकेशनल, अवेयरनेस जेनरेटिंग प्रोग्राम्स हैं। इग्नू में अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, प्रोफेशनल स्तर पर कोर्सेज की कमी नहीं है। हालांकि इग्नू के अलावा भी कई अन्य इंस्टीट्यूट डिस्टेंस लर्निंग करा रहे हैं। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर ओपन युनिवर्सिटी (हैदराबाद), मदुरै कामराज युनिवर्सिटी (मदुरै), दिल्ली युनिवर्सिटी (दिल्ली), मद्रास युनिवर्सिटी (चेन्नई), सिंबोसिस (पुणे), सिक्किम मनिपाल युनिवर्सिटी, नालंदा ओपन युनिवर्सिटी, कर्नाटक ओपन युनिवर्सिटी, महात्मा गांधी युनिवर्सिटी, कोटट्म (केरल), उस्मानिया युनिवर्सिटी (हैदराबाद), अन्नामलाई युनिवर्सिटी (तमिलनाडु) शामिल हैं।

क्या हैं फायदे

60 से 65 फीसदी छात्र नौकरी-पेशे से जुड़े होते हैं। इनके लिए अपने बिजी शिड्यूल में रेगुलर कोर्सेज के लिए वक्त निकालना मुश्किल होता है। डिस्टेंस कोर्सेस की मदद से अपनी क्वालीफिकेशन को बढ़ाकर तरक्की का सपना पूरा करते हैं।
महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा की राह खोलता है।
शिक्षा क्षेत्र में उम्रदराज लोगों की मौजूदगी यह बताने के लिए काफी है कि लोग बढ़ती उम्र में भी पढ़ाई का रुझान रखते हैं।
शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए डिस्टेंस लर्निंग संभावनाओं का एक सोर्स है। डिस्टेंस लर्निंग इन्हें बिना कहीं जाए, घर बैठे डिग्री व डिप्लेामा पाने का अवसर देता है।
औसत प्रतिभा वाले उन छात्रों के लिए भी डिस्टेंस लर्निंग बड़ा सहारा है जो सीमित सीटों के चलते अक्सर प्रोफेशनल कॉलेजों में एडमिशन की दौड़ में पीछे रह जाते हैं।

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