बेस्ट ऑफ़ लक

फरवरी एग्जाम्स का महीना होता है। 15 फरवरी से सीबीएसई, 18 फरवरी से यूपी और 27 फरवरी से आईसीएसई की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। फाइनल एग्जाम स्टूडेंट्स को तनाव में जकड़ लेता है, वहीं अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा देता है। कारण यह कि इन्हीं एग्जाम्स के रिजल्ट के आधार पर कॅरियर को दिशा देने के मौके मिलेंगे। हम आपको डरा नहीं रहे, बल्कि सचेत कर कुछ हिदायतें दे रहे हैं, जिससे आप बोर्ड की परीक्षाओं में अच्छे नंबर हासिल करें। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चे जितना फ्री होकर पढ़ेंगे-सीखेंगे, उतना ही अच्छा उनका परफॉर्मेंस होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब शेष दिनों में टाइम टेबल के हिसाब से पढ़ाई करना उचित होगा। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करें। यह तरीका कठिन से कठिन सवालों के जवाब के समाधान करना सिखा देगा और सब्जेक्ट पर पकड़ भी मजबूत होगी। इस समय कुछ नया विषय पढऩे की बजाय जितना पढ़ा है उसे दोहराएं और पुराने पूछे गए सवालों को लिखकर याद करें। यह समय है प्री एग्जाम की स्मार्ट तैयारी का। जैसे-जैसे परीक्षा के दिन पास आते हैं, डिप्रेशन, घबराहट, बेेचैनी और चिंता घेर लेती है।

इससे निपटने के लिए पढ़ाई के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक जरूर लें। ब्रेक में टहलें, मनपसंद गाना सुनें, पहेली हल करें, भागने वाले खेल खेलें, फल खाएं। ब्रेक लेने से मांसपेशियों को आराम मिलता है। इसके अलावा दिमाग में ऑक्सीजन की आपूर्ति और एंड्रोफन हार्मोन का सर्कुलेशन होता है, जो दिमाग को तरोताजा रखता है और कॉन्फिडेंस बढ़ाता है। जब तक एग्जाम चल रहे हैं, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं।

मम्मी-पापा भी रहें कूल : मम्मी-पापा का भी एग्जाम्स में अहम योगदान होता हैै। कई बार कुछ मम्मी-पापा एग्जाम के दिनों में बच्चों को बार-बार ताने मारने वाले अंदाज में पढऩे को कहते रहते हैं। पढ़ लो नहीं तो फेल हो जाओगे, नहीं पढ़ोगे तो अपने दोस्तों से पिछड़ जाओगे। परीक्षा के दिन हैं और इसके कान पर जूं तक नहीं रेंगती। इस उम्र में तो हम रात-रात भर जागकर पढ़ा करते थे। ऐसी बातें सुनकर बच्चा झुंझला जाता है। निगेटिव बातें किसी के भी मन पर हथौड़े की तरह प्रहार करती हैं, इसलिए बच्चे से हर समय पॉजिटिव बातें करने का प्रयास करें। बच्चे के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं। उसे खेलने-कूदने, संगीत सुनने, समय पर भोजन करने और सो जाने को कहें। उसकी समस्याओं को जानें कि वह कहां अटक रहा है या कमजोर महसूस कर रहा है, उसे दुरुस्त करने का प्रयास करें।

खान-पान पर दें ध्यान : एग्जाम के दिनों में तनाव और घबराहट होने की वजह से अकसर बच्चों का खान-पान प्रभावित हो जाता है। उनका मेटाबॉलिज्म यानी भूख और पाचन का चक्र गड़बड़ हो जाता है। मम्मी-पापा की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को समय से भोजन कराएं और समय पर उन्हें सोने को कहें। परीक्षाओं तक आहार और जीवनशैली में बदलाव लाना बहुत जरूरी है। इसके लिए 7 से 8 घंटे की नींद लें, चाय-कॉफी, जंक फूड से परहेज करें।

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