बेख़ौफ़ : कालाबजारी चरम पर, मनमानी कीमत पर बेच रहे राशन व सब्‍जी

लखनऊ : कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन में सबसे ज्यादा राशन और सब्जी पर कालाबाजारी हो रही है। डीएम द्वारा निर्धारित खाध पदार्थों को मूल्‍य से अधिक बेचा जा रहा है। तमाम कोशिशों के बाद भी दामों पर नियंत्रण व कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। फल व गल्‍ला मंडी में महंगाई की मार बताकर फुटकर दुकान दार महंगे दामों में फल, सब्‍जी व प्रोविजन से जुडा सामान बेच रहे हैं।

डीएम के यहां 26 मार्च को जो रेट लिस्‍ट जारी की गई थी, जब इस बाबत दुकानदारों से पूछा गया तो एक जवाब था जब उन्‍हें सामान महंगा मिलेगा, तो उन्‍हें भी अपने खर्चे निकालने के लिए दो पैसे कमाने होंगे। अरहर दाल 100 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जबकि 20 मार्च तक यही दाल 89 रुपये प्रति किलो थी। चना दाल कई दुकानों में थी, एक दुकानदार ने इसके रेट 75 रुपये प्रति किलो बताए।बताए। मूंग दाल 115 रुपये प्रति किलो वहीं आटा तीस रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है, हालांकि यही आटा चंद दिनो पहले 34 से 40 रुपये प्रति किलो था। चावल मोटा भी 35 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है।

चीनी निर्धारित मूल्‍य 38 रुपये से बढाकर 42 से 45 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है। इस संबंध में जब दुकानदार से पूछा गया तो दुकानदार ने तर्क था कि खुली चीनी 42 में है और चीनी मील से पैकेट में आने वाली तीन ब्रांड की चीनी 45 रुपये प्रति किलो तक बेची जा रही है। सरसों तेल जो हर शख्‍स के यहां इस्‍तेमाल किया जा रहा है, वहां भी निर्धारित मूल्‍य 110 से बढाकर 120 से 125 रुपये बेचा जा रहा है।

इसी तरह सब्जियों में टमाटर 35 से 40 रुपये प्रति किलो, सेब 100 से 120 रुपये प्रति किलो तक फल मंडी में है जबकि केला पचास से साठ रुपये का एक दर्जन बेचा जा रहा है। उधर प्‍याज जो सप्‍ताह भर पहले पचास रुपये प्रति किलो था, वह तीस से 35 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। जबकि लौकी साठ रुपये से घटकर 30 से 35 रुपये प्रति किलो हो गई है। लोबिया 120 रुपये प्रति किलो बेची जा रही है। लॉकडाउन में लोगों कि खूब जेब कट रही है।

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