बैंक की महालूट और दो गिरोहबाजों की पैतरेबाजी

अखिलेश अखिल

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो: खेल शुरू हो गया है। राजनीतिक नर्तन जारी है। सोशल मीडिया पर भक्तों और कुभक्तों के बीच एक से बढ़कर एक तकरार चल रही है। राजनीतिक दलों की शह कहिये या फिर मिलजुल कर बांटने के इस खेल में नेता से ज्यादा पब्लिक में बहस जारी है। दोनों गिरोहों के समर्थकों में मारपीट की हालत बनी हुयी है और गाली गलौज की तो बात ही मत पूछिए।

कोई इसे कांग्रेस काल का घोटाला बता रहा है तो कोई बीजेपी सरकार की कारस्तानी। लेकिन नेता लोग चुप है। भूखी और सुखी जनता आपस में ही फरियाती दिख रही है। दिनभर गाली गलौज के बाद शाम को राजनीतिक गिरोहों की चुप्पी टूटी। लोकतंत्र है तो कुछ बोलना जरुरी है। बोलने से पहले सारे समीकरण तय कर लिए गए थे। संभावित प्रश्नो पर प्रैक्टिस कर लिया गया था और उसके उत्तर भी खोज लिए गए थे। अपने अपने बचाव के मामले तलाश लिए गए थे।

पहले कांग्रेस की बारी थी। विपक्षी जो है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि सरकार की नाक के नीचे इतना बड़ा घोटाला कैसे हो गया? कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि 26 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री को नीरव मोदी और उसके रिश्तेदार से जुड़े सभी कागजात सौंप दिए गए थे। कहा गया था कि शिकायत में 42 एफआईआर दर्ज हुई। पीएम ऑफिस को शिकायत की जानकारी थी और उन्होंने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को एक्शन लेने के लिए भी भेजा लेकिन अंत में कुछ नहीं कर पाए।

सुरजेवाला ने कहा कि कैसे नीरव मोदी और मेहुल चौकसी मोदी सरकार की नाक के नीचे फर्जी लेटर ऑफ अंडरस्टेंडिंग के माध्यम से पूरे बैंकिंग सिस्टम को धोखा दे सकते हैं? छोटे मोदी द्वारा की गई इस सबसे बड़ी बैंक लूट के लिए कौन जिम्मेदार है? कांग्रेस इन सवालों के साथ अपने लोकतांत्रिक कर्तव्यों का पालन किया। उधर कांग्रेस के वार का बीजेपी को इन्तजार था।

दूसरी तरफ केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री एसपी शुक्ला ने मीडिया को दिए बयान में घोटाले का ठीकरा कांग्रेस के सिर फोड़ा। उन्होंने कहा कि 2011 में हमारी सरकार नहीं थी, अगर कांग्रेस हम पर आरोप लगा रही है तो 2011-14 तक वो क्या सो रही थी। हमारी सरकार मामले की जानकारी लेकर उसकी जांच कर रही है। कांग्रेस एक घोटालों की सरकार थी और उन्हीं ने इन घोटालोबाजों को स्टेबलिश किया। मामला कुछ और आगे बढ़ा। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने काफी तीखे स्‍वर में कांग्रेस पर निशाना साधा और सबसे पहले इस घोटाले के बाद ‘छोटा मोदी’ जैसे शब्‍दों के प्रयोग पर कड़ा विरोध दर्ज किया।

उन्‍होंने इस प्रकार की भाषा की कड़ी निंदा की। इसके बाद कई ऐसे वाक्‍यों के बारे में बताया जिससे कांग्रेस सरकार पर सवाल उठे। उन्‍होंने बताया कि 2013 में नीरव मोदी के शो में राहुल भी गए थे। इसके साथ ही प्रसाद ने कहा कि चाहे कोई भी हो किसी को माफ नहीं किया जाएगा और इस मामले पर त्‍वरित कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उन्‍होंने माल्‍या के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि आप लोग खुद ही बताइए कि क्‍या मालया के खिलाफ हमारे प्रयासों में आपको कोई कमी नजर आई है।

इसे ही कहते हैं राजनीतिक नौटंकी। सच तो यही है कि राजनीति करने वाले कभी सच्चे नहीं होते। राजनीति की शुरुआत झूठ से होती है और ठगी से गुजरती हुए जांच पर ठहर जाती है। और जांच का अंजाम क्या होता है इसके लिए अब तक के घोटालों की जांच के परिणाम को पढ़िए। सच तो यही है कि राजनीतिक दलों की वजह से नीरव ने बैंक को लूट लिया।

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