बैन हटते ही मायावती ने EC पर साधा निशाना, बोलीं- भाजपा पर ऐसी मेहरबानी रही तो निष्पक्ष चुनाव असंभव

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग ने आचार संहिता उल्लंघन करने पर मायावती पर 48 घंटे तक प्रचार अभियान में रोक 18 अप्रैल को सुबह 6 बजे खत्म हो गया। चुनावी प्रचार के बैन की मियाद खत्म होते हुए उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। बीएसपी प्रमुख का कहना है कि आयोग ने जिस तरह से भेदभाव का तरीका अपनाया है ऐसी स्थिति में निष्पक्ष चुनाव नामुमकिन है।

चुनाव प्रचार पर बैन के 48 घंटे पूरे होने के बाद मायावती ने ट्वीट करके पूछा कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ बैन के बाद मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं और चुनावी लाभ ले रहे हैं। उन पर आयोग इतना मेहरबान क्यों है? मायावती ने ट्वीट कर कहा, ‘चुनाव आयोग की पाबंदी का खुला उल्लंघन करके यूपी के सीएम योगी शहर-शहर व मन्दिरों में जाकर एवं दलित के घर बाहर का खाना खाने आदि का ड्रामा करके तथा उसको मीडिया में प्रचारित/प्रसारित करवाके चुनावी लाभ लेने का गलत प्रयास लगातार कर रहे हैं किन्तु आयोग उनके प्रति मेहरबान है, क्यों?’

मायावती ने पूछा, ‘अगर ऐसा ही भेदभाव व भाजपा नेताओं के प्रति चुनाव आयोग की अनदेखी व गलत मेहरबानी जारी रहेगी तो फिर इस चुनाव का स्वतंत्र व निष्पक्ष होना असंभव है। इन मामलों मे जनता की बेचैनी का समाधान कैसे होगा? बीजेपी नेतृत्व आज भी वैसी ही मनमानी करने पर तुला है जैसा वह अबतक करता आया है, क्यों?’

पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि आज दूसरे चरण का मतदान है और बीजेपी व पीएम मोदी उसी प्रकार से नरवस व घबराए लगते हैं जैसे पिछले लोकसभा चुनाव में हार के डर से कांग्रेस व्यथित व व्याकुल थी। इसकी असली वजह सर्वसमाज के गरीबों, मजदूरों, किसानों के साथ-साथ इनकी दलित, पिछड़ा व मुस्लिम विरोधी संकीर्ण सोच व कर्म है।

बता दें, देवबंद रैली में दिए गए भाषण पर एक्शन लेते हुए चुनाव आयोग ने मायावती के प्रचार करने पर 48 घंटे की रोक लगाई थी। ये बैन मंगलवार सुबह 6 बजे शुरू हुआ और 18 अप्रैल सुबह 6 बजे तक चला। इन 48 घंटे में मायावती कोई चुनावी सभा, रोड शो या राजनीतिक ट्वीट नहीं कर सकती थीं। 48 घंटे पूरे होने के बाद मायावती ने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया है। मायावती ने कहा कि बीजेपी नेताओं के प्रति चुनाव आयोग की अनदेखी व गलत मेहरबानी जारी रहेगी तो फिर इस चुनाव का स्वतंत्र व निष्पक्ष होना असंभव है।

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