बॉलीवुड का ऐसा सुपरस्टार जिसकी दो ख्वाहिशें मरते दम तक रही अधूरी, इनके नाम पर जारी हुआ था डाक टिकट !

हिंदी सिनेमा में ऐसे कई अभिनेता हुए हैं, जिन्होंने अपने अभिनय के दम पर खूब नाम कमाया। अपने प्रोफेशनल करियर में तो उन्होंने बुलंदियों के नए आयाम गढ़े लेकिन निजी जीवन में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखें। हम आज बात कर रहे हैं सुपरस्टार संजीव कुमार की। जिन्होंने अपने अभिनय के दम पर खूब नाम कमाया लेकिन उन्हें कभी प्यार नसीब नहीं हुआ। संजीव कुमार की दो ख्वाहिशें ऐसी थी, जो कभी पूरी नहीं हो सकी। अगर संजीव कुमार को बॉलीवुड का ‘ट्रेजेडी किंग’ कहना गलत नहीं होगा। आज हम आपको संजीव कुमार से जुड़ी कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं।

संजीव कुमार का असली नाम हरिभाई जरीवाला था। फिल्मों में नाम कमाने के लिए अभिनेता ने अपना नाम बदल लिया था। संजीव कुमार ने जिस स्कूल से एक्टिंग सीखी थी, वहां एक एक सीनियर ने उन्हें फिल्म ‘हम हिन्दुस्तानी’ ऑफर की थी। ये संजीव की पहली फिल्म थी। इस फिल्म में उनका रोल एक कांस्टेबल का था, जो अदालत में कठघरे के बाहर खड़ा रहता है। खास बात ये थी कि इस फिल्म में संजीव कुमार एक भी डायलॉग नहीं था।

इस फिल्म के बाद संजीव कुमार को फिल्मों के ऑफर्स आने लगे थे। इसके बाद उन्होंने राजा और रंक, बचपन, शिकार जैसी कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें पहचान नहीं मिली। पहली बार उन्हें साल 1970 में आई फिल्म खिलौना में नोटिस किया गया था। यही से संजीव कुमार को पहचान मिली। संजीव हिंदी सिनेमा के एक ऐसे अभिनेता हैं, जिन्होंने फिल्मों में सबसे ज्यादा बार पुलिस अफसर का रोल किया है।

अभिनेता को भाई की तरह मानने वाली अभिनेत्री अंजू महेंद्र ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि जिन महिलाओं के साथ भी उनका अफेयर रहा उन पर संजीव काफी शक किया करते थे। उन्हें लगता था कि वे उन्हें नहीं उनके पैसों को चाहती हैं। इसी सोच के चलते उनकी शादी भी नहीं हो पाई। संजीव कुमार का नाम अभिनेत्री विजेता पंडित की बहन सुलक्षणा पंडित, सुचित्रा सेन, जया प्रदा, हेमा मालिनी, जया बच्चन के साथ जुड़ा  मगर किसी के साथ भी उनकी जोड़ी नहीं बन पाई।

इसके अलावा अंजू महेंद्र ने बताया था कि संजीव कुमार मुंबई में अपना घर खरीदना चाहते थे। उनकी ख्वाहिश ही थी मुंबई नगरी में उनका खुद का एक बंगला हो। लेकिन जब भी उन्हें जब उन्हें कोई बंगला पसंद आता और उसके लिए पैसे जुटाते तब तक उसके भाव बढ़ जाते। यह सिलसिला कई सालों तक चलता रहा। जब पैसे जमा हुए और घर पसंद आया तो पता चला की वह जमीन किसी कानूनी पचड़े में फंसी है। आखिर में ये हुआ कि संजीव कुमार कभी खुद का घर खरीद ही नहीं पाये।

कहा तो ये भी जाता है कि संजीव कुमार हेमा मालिनी से शादी करना चाहते थे। उन्होंने ‘ड्रीम गर्ल’ को मनाने की कोशिश भी की थी, लेकिन हेमा ने उनके शादी के प्रस्ताव को दो बार ठुकरा दिया। इसके बाद भी संजीव कुमार ने हार नहीं मानी और अपने जिगरी दोस्त और अभिनेता जितेंद्र को भेजा हेमा को मनाने के लिए। जितेंद्र हेमा के पास गए तो थे उन्होंने मनाने के लिए लेकिन वहां जाकर अभिनेता ने अपनी ही शादी की बात अभिनेत्री से कर डाली। जितेंद्र का प्रस्ताव सुनकर हेमा मालिनी भी राजी हो गई लेकिन बाद में धर्मेंद्र के समझाने पर उन्होंने जितेंद्र को छोड़कर बॉलीवुड के ‘हीमैन’ से ही शादी रचा ली।

फिर क्या था संजीव कुमार का दिल टूट गया और वो इस गम में हद से ज्यादा शराब पीने लगे थे। इसके बाद उन्होंने कभी किसी अभिनेत्री के आगे शादी की बात नहीं रखी। संजीव कुमार का 6 नवंबर 1985 को 47 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। संजीव कुमार ने अपने करियर में हर तरह की फिल्में की। वे सिर्फ हीरो ही नहीं बनना चाहते थे। उनका मानना था कि कलाकार किसी भी भूमिका को अपने अभिनय से बेहतरीन बना सकता है और रोल की लंबाई कोई मायने नहीं रखती।

सूरत में एक सड़क और एक स्कूल का नाम संजीव कुमार के नाम पर रखा गया। 3 मई 2013  में इंडिया पोस्ट के द्वारा संजीव कुमार के सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया गया था। संजीव कुमार की मौत के बाद उनकी 10 फिल्में रिलीज हुई थीं। इनमें से अधिकांश फिल्मों की शूटिंग बाकी रह गई थी। कहानी में फेरबदल कर इन्हें प्रदर्शित किया गया था। 1993 में उनकी अंतिम फिल्म ‘प्रोफेसर की पड़ोसन’ प्रदर्शित हुई थी।

Source:- Amar Ujala

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper