बोम्मई सरकार पर कर्नाटक कांग्रेस का हमला- पैसों से धनी मंदिरों को संघ परिवार के हवाले करना चाहते हैं

नई दिल्ली: कर्नाटक में बसवाराज बोम्मई सरकार ने हिंदू मंदिरों को राज्य सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने की योजना बनाई है। लेकिन अब राज्य में कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वो बोम्मई सरकार की इस योजना का विरोध करेगी। पार्टी ने कर्नाटक सरकार की इस योजना को ऐतिहासिक भूल बताया है और कहा कि पार्टी इसकी अनुमति नहीं देगी। कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डी.के.शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि वर्तमान में सरकार के स्वामित्व वाले मंदिर राज्य की संपत्ति और खजाने हैं।

यह सरकार की संपत्ति है- शिवकुमार
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डी.के.शिवकुमार ने कहा, ‘वे ऐतिहासिक भूल कर रहे हैं, मुजराई (विभाग) या सरकारी मंदिर प्रशासन के लिए स्थानीय लोगों को कैसे दिए जा सकते हैं? यह सरकार की संपत्ति है, राजकोषीय संपत्ति है, इन मंदिरों द्वारा करोड़ों रुपये एकत्र किए जाते हैं। यह कैसा राजनीतिक रुख है? क्या वे (भाजपा) कुछ अन्य राज्यों की देखा देखी ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं?’

RSS को देना चाहती है मंदिर
कांग्रेस नेता ने कहा कि कर्नाटक सरकार पैसों से धनी सभी मंदिरों और संपत्तियों को संघ परिवार को देना चाहती है। वो लोग ऐसा करने के लिए कानून लाने की तैयारी में हैं, लेकिन हम इसकी अनुमति नहीं देंगे। वो सिर्फ हिंदुत्व के बारे में बात करते हैं। हम हिंदू हैं और हम इसकी इजाजत नहीं देंगे।’ उन्होंने बताया कि चार जनवरी को हम सभी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की बैठक कर रहे हैं, इस दौरान हम इस पर चर्चा करेंगे और अपना रुख सामने रखेंगे।

बोम्मई सरकार की यह है योजना
दरअसल कर्नाटक सरकार हिंदू मंदिरों को उन कानूनों और नियमों से मुक्त करने के उद्देश्य से एक कानून लाने की तैयारी में है जो वर्तमान में उन्हें नियंत्रित करते हैं। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार को हुबली में प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही थी। मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘मैं इस कार्यकारिणी को बताना चाहता हूं कि हमारी सरकार बजट सत्र से पहले इस आशय का एक कानून लाएगी। हम अपने मंदिरों को ऐसे कानूनों और शर्तों से मुक्त करेंगे। नियमन के अलावा और कुछ नहीं होगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वे स्वतंत्र रूप से प्रबंधित होते हैं।’ अगर यह विधेयक कानून बनता है तो मंदिर सरकार के नियंत्रण से मुक्त हो जाएगी

वीएचपी ने उठाई थी मांग
राज्य में कुल 34,563 मंदिर मुजराई (हिंदू धार्मिक बंदोबस्ती) विभाग के अंतर्गत आते हैं, जिन्हें उनके राजस्व सृजन के आधार पर ग्रेड ए, बी और सी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। 25 लाख रुपये से अधिक वार्षिक राजस्व वाले कुल 207 मंदिर श्रेणी ए के अंतर्गत आते हैं, पांच लाख रुपये से 25 लाख रुपये के बीच के 139 मंदिर श्रेणी बी के अंतर्गत आते हैं, और 34,217 मंदिर श्रेणी सी के तहत 5 लाख रुपये से कम वार्षिक राजस्व के साथ आते हैं। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) सहित कई हिंदू संगठनों की लंबे समय से मांग रही है कि मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए और उन्हें हिंदू समाज को सौंप दिया जाए।

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