भाजपा ने गणतंत्र के मूल्यों व सिद्धान्तों को मनतंत्र में ढालने का प्रयास किया: मायावती

लखनऊ ब्यूरो। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा है कि केन्द्र की भाजपा सरकार ने भारतीय गणतंत्र के मूल्यों व सिद्धान्तों को ताक पर रखकर जिस प्रकार से इसे अपने ‘मनतंत्र’ की संकीर्णता में ढकेलने का प्रयास अपने शासन के लगभग पांच वर्षों में किया है, वह अनुचित व अति-दुर्भाग्यपूर्ण है।

मायावती ने उत्तर प्रदेश के सभी नागरिकों को 70वें गणतन्त्र दिवस की शुभकामनायें देते हुए कहा कि अब कुछ नया करने का समय नजदीक आ गया है, ताकि देश का संविधान अपनी सच्ची मंशा व भावना के साथ जनहित व जनकल्याण की साधना करके देश की लगभग सवा सौ करोड़ से अधिक गरीब व मेहनतकश जनता का जीवन सजा व संवार सके।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अपने बधाई संदेश में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘स्वतंत्रता दिवस’ के बाद गणतंत्र दिवस ही वह महान दिन है बल्कि राष्ट्रीय पर्व है जिसका देश की आमजनता के जीवन में विशेष महत्व है। इसी ही दिन से बाबा साहेब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर का मानवतावादी संविधान देश में लागू हुआ और समस्त समाज, हर वर्ग व हर अमीर-ग़रीब को समता व समानता के सूत्र में बांधने वाला ‘एक व्यक्ति-एक वोट और हर वोट का एक समान मूल्य’ का क्रान्तिकारी सिद्धान्त लागू हुआ।

बसपा प्रमुख ने कहा कि वोट का अधिकार जो ख़ासकर कमज़ोर व पिछड़े वर्ग के लोगों के लिये अपना जीवन सुधारने का बहुत बड़ा वरदान है, जिसे चुनाव के समय में कभी भी गवाना नहीं चाहिये। 70वां गणतंत्र दिवस वास्तव में आकलन करने का समय है कि इन वर्षों में विभिन्न पार्टियों की खासकर केन्द्र में रही सरकारों में गरीबों, मजदूरों, किसानों, दलितों, आदिवासियों व पिछड़े वर्ग व अल्पसंख्यक वर्ग पर आधारित बहुजन समाज ने क्या पाया और उनके जीवन में क्या कोई बेहतर बदलाव आया है। क्या उन्हें जातिवाद के अभिशाप से मुक्ति मिली है? उनके साथ सरकारी भेदभाव व तिरस्कार समाप्त होकर क्या सरकारी नौकरियों व शिक्षा आदि में समुचित भागीदारी मिली है?

मायावती ने कहा कि देश की गरीब व अति-जरूरतमन्द जनता के हित में अब तक का अनुभव तो यही बताता है कि संविधान को उसकी असली जनहित व जनकल्याण की मंशा के हिसाब से लागू ही नहीं किया गया है वरना देश की आजादी के बाद से अब तक सात दशकों से अधिक के समय में देश के लोगों की तकदीर काफी कुछ संवर गई होती।

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