भाजपा सांसदों को आरोप, शाहीन बाग को हटाने के लिए कोर्ट ने कड़े कदम नहीं उठाएं

नई दिल्ली: दिल्ली हिंसा पर लोकसभा में बयान देकर बीजेपी सांसद मीनाक्षा लेखी ने जजों की घेराबंदी की। उन्होंने कुछ जजों पर बगैर नाम लिए नरम रवैया अपनाने का आरोप लगाकर कहा कि शाहीन बाग को हटाने के लिए कोर्ट ने भी कड़े कदम नहीं उठाए। लेखी ने कहा दिल्ली हाईकोर्ट के जज एस मुरलीधर को स्थानातंरित को नियमित प्रक्रिया बताकर कहा कि उस किसी अन्य संदर्भ में लेना गलत है।

लेखी ने कहा, कुछ जजों का मानना है कि जब तक धरना हिंसात्मक ना हो, तब तक पुलिस कार्रवाई नहीं करेगी। अब धरना कब हिंसात्मक होगा यह बैठकर कौन तय करेगा। उन्होंने कहा कि बगैर सिफारिश के किसी भी जज का स्थानातंरित नहीं किया जाता और उनका (मुरलीधर) तो ट्रांसफर पहले ही हो चुका था। लेखी ने विपक्षी सांसदों पर निशाना साधकर कहा कि आईबी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि सभी को समझ आ जाए कि किसी का ट्रांसफर क्यों हुआ है।

लेखी ही नहीं बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने भी दिल्ली हिंसा के लिए न्यायपालिका को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि दिल्ली में बढ़ते तनाव के लिए कोर्ट जिम्मेदार है, जिसकी वजह से बाद में हिंसा हुई। जायसवाल ने कहा कि हम जनप्रतिनिधि होने के बावजूद रेल या सड़क जाम करते हैं,तब हमें भी कोर्ट से सजा मिलती है। लेकिन कोर्ट की ओर से दी गई अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब रेल और सड़क जाम करना नहीं है।

जायसवाल ने कहा कि जब दिल्ली में रोजाना 10 लाख लोगों को दिक्कतें आ रही थीं, तब कोर्ट प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए वार्ताकार भेज रहा था। वहां प्रदर्शनकारियों ने वार्ताकारों से कहा कि सड़क वहां लोग नहीं बल्कि पुलिस जाम कर रही है। जायसवाल ने कहा कि फिर कोर्ट को कहना चाहिए कि सड़क जाम करना अपराध नहीं है, यहां तक कि शांतिपूर्ण ढंग से सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना भी क्राइम नहीं है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper