भारतीय रेलवे साल 2030 तक हो जाएगी ग्रीन रेलवे, सोलर एनर्जी से जगमग होंगे स्टेशन

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने साल 2030 तक ग्रीन रेलवे में बदलने का लक्ष्य रखा है। ऐसा मकाम हासिल करने वाली भारतीय रेल दुनिया की पहली रेलवे होगी। रेल मंत्रालय ने ग्लोबल वार्मिंग को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कई बड़ी पहल की है। रेलवे ने 40,000 से अधिक रूट किमी (आरकेएम) का विद्युतीकरण पूरा कर लिया है, जिसमें 2014-20 के दौरान 18,605 किलोमीटर का विद्युतीकरण कार्य किया गया है। इससे पहले, 2009-14 की अवधि के दौरान केवल 3,835 किमी विद्युतीकरण का काम पूरा हुआ था।

रेल मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि भारतीय रेलवे ने साल 2020-21 के लिए 7,000 आरकेएम के विद्युतीकरण का लक्ष्य तय किया है। ब्रॉड गेज (बीजी) नेटवर्क पर सभी मार्गों को दिसंबर 2023 तक विद्युतीकृत करने की योजना बनाई गई है। रेलवे अंतिम मील कनेक्टिविटी के विद्युतीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए, कोरोना वायरस की अवधि के दौरान 365 किमी के प्रमुख कनेक्टिविटी कार्य को चालू किया गया है।

सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई पहल
भारतीय रेलवे ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की है। भारतीय रेलवे रूफटॉप सोलर पैनल (डेवलपर मॉडल) के माध्यम से 500 मेगा वाट ऊर्जा की क्षमता का दोहन करने के लिए काम कर रहा है। अब तक 900 स्टेशनों सहित विभिन्न इमारतों की छत पर 100 मेगा वाट के सोलर प्लांट लगाए गए हैं। 400 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाले सौर संयंत्र निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं। निविदाएं पहले से ही 245 मेगावाट के लिए प्रदान की जाती हैं और इन संयंत्रों को पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2022 है।

पवन ऊर्जा पर भी काम चालू
पवन ऊर्जा क्षेत्र में 103 मेगावाट पवन आधारित बिजली संयंत्रों को पहले ही चालू कर दिया गया है। इनमें 26 मेगावाट राजस्थान (जैसलमेर) में, 21 मेगावाट तमिलनाडु में और 56.4 मेगावाट महाराष्ट्र (सांगली) में है। भारतीय रेलवे ने तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक में अगले दो वर्षों में 200 मेगावाट पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई है।

जलवायु परिवर्तन में अपनी भूमिका का एहसास करते हुए भारतीय रेलवे ने इमारतों और स्टेशनों की 100 प्रतिशत एलईडी रोशनी जैसी अन्य हरित पहल शुरू की है। ग्रीन इनिशिएटिव्स के क्षेत्र में भारतीय रेलवे में 2,44,000 से अधिक जैव-शौचालयों के साथ कुल 69,000 कोच लगाए गए हैं।

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