भारतीय संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए संस्कृत भाषा जरूरी

लखनऊ: पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि भारत की संस्कृति तथा संस्कृत भाषा एक-दूसरे के पूरक हैं। संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए संस्कृत भाषा की महती आवश्यकता है। संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने तथा उसको जन भाषा के रूप में संरक्षित करने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि संस्कृत देव वाणी है। इसी के बूते पर भारत विश्व गुरु की उपाधि एक बार पुनः हासिल करेगा।

पर्यटन मंत्री मंगलवार को उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा गुरु पूर्णिमा के पर्व पर सेवानिवृत्त संस्कृत अध्यापकों को सम्मानित किये जाने के लिए आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् को बधाई देते हुए कहा कि गुरुओं को सम्मान देकर संस्थान ने संस्कृत भाषा को सम्मानित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार संस्कृत भाषा की गरिमा को बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में संस्कृत भाषा के प्रति लोगों की रुझान बढ़ी है। उन्होंने संस्कृत के शिक्षकों से इस भाषा का खोया हुआ गौरव पुनः वापस दिलाने के लिए पूरी कोशिश करने की अपील की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रमुख सचिव भाषा जितेन्द्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत भाषा सभी भाषाओं की जननी है। जब भारत विश्वगुरु के रूप में पूरी दुनिया में प्रसिद्ध था तब भारत की भाषा संस्कृत थी। उन्होंने कहा कि जब यूरोपीय देशों के पास ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड विश्वविद्यालय जैसी संस्था नहीं थी तब सभी विषयों के अध्ययन-अध्यापन में भारत सबसे आगे था। उस समय भी भारत की भाषा संस्कृत थी।

प्रमुख सचिव ने कहा कि अंग्रेजों द्वारा तैयार किये गये शैक्षिक पाठ्यक्रम के कारण धीरे-धीरे संस्कृत भाषा उपेक्षित होती चली गई। उन्होंने गुरुओं का आह्वान किया कि उस समय की वैदिक गणित, खगोलशास्त्र, शल्य चिकित्सा बहुत समृद्ध थी उसे पुनः आगे लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस कार्य को शिक्षक ही कर सकते हैं। सम्मान कार्यक्रम को देव मुनि महाराज ने अपना आशीर्वचन दिया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के 18 मंडलों से आये 225 से अधिक सेवानिवृत्त संस्कृत अध्यापकों को पर्यटन मंत्री एवं संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र एवं प्रमुख सचिव भाषा जितेन्द्र कुमार ने सम्मानित किया। इस अवसर पर उज्जैन से आये नाट्य दल ने सरमा पणि संस्कृत नाटक का मंचन किया।

इस मौके पर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के अध्यक्ष डॉ. सदानंद गुप्त, लखनऊ विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रो. अरुणा शुक्ला सहित गणमान्य लोग उपस्थित थे। संस्थान के निदेशक पवन कुमार ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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