भारत के ऐसे 5 काले दिन जिसे शायद हम कभी ना भूल पाए

हम भारतीय भले ही कितने भी आगे निकल जाएं भले कितनी भी नई-नई तकनीक अपनाले परंतु प्रकृति आपदाओ ने हमेशा अपने आप को शक्तिशाली साबित किया है। इन्ही कुछ सालों में हुए कई दर्दनाक हादसे भारत के लिए बहुत बड़ा नुकसान बने हैं आइए जानते हैं किन्हीं पांच ऐसे हादसों के बारे में।

उत्तराखंड में आकस्मिक बाढ़

वर्ष 2013 शायद ही कोई भूल पाएगा जहां बादल फटने के कारण गंगा नदी उफान पर आ गई थी जिसके कारण गोविंदघाट, केदारधाम, रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी नेपाल, जैसी जगहों पर भारी प्रभाव पड़ा यहां करीब 5000 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई. और जिसमें से कई लोग लापता भी हैं. 14 से 17 जून 2013 तक 4 दिनों के लंबे समय तक बाड़ रही और भूस्खलन जारी रहा. केदारनाथ के तीर्थ यात्रा पर निकले करीब 100000 से अधिक लोग घाटियों में फंस गए थे। आज उत्तराखंड अकास्मिक बाढ़ भारत के इतिहास की सबसे विनाशकारी बाढ़ मानी जाती है।

हिंद महासागर सुनामी
9.1 और 9.3 मापी गई. 2004 में एक बड़े विनाशकारी भूकंप के बाद हिंद महासागर में एक विनाशकारी विशाल सुनामी उत्पन्न हुई जिससे दक्षिणी भारत के हिस्सों से लेकर अंडमान निकोबार दीप समूह श्रीलंका इंडोनेशिया आदि जगह प्रभावित हुई यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा भूकंप था जिसकी क्षमता हिरोशिमा में डाले गए बमों के प्रकार के 23000 परमाणु बमों की ऊर्जा के बराबर थी जिसमें 2 लाख से अधिक लोग मारे गए थे।

गुजरात भूकंप
जिस दिन यह भूकंप आया उस दिन अपना भारत 51 वें गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहा था यानी 26 जनवरी 2001. यह वो दिन था जिस दिन करीब 20 हज़ार लोगों की मृत्यु हो गई और 167000 लोग घायल हुए थे और लगभग 400000 लोग बेघर हो गए करीब 2 मिनट तक जारी रहा यह भूकंप 7.6 से 7.9 तक की रेंज में था।

उड़ीसा महा चक्रवात
अब आज के समय में इतने बड़े चक्रवात नहीं आते जिससे कि हमारा बहुत ज्यादा नुकसान हो. परंतु उड़ीसा में 1999 में एक ऐसा तूफानी चक्रवात आया जिसे पांचवी के रूप में जाना जाता है. इस चक्रवात के कारण 10,000 से अधिक लोग मृत्यु को प्राप्त हुए 275 हजार से अधिक घर नष्ट हो गए और करीब 1670000 लोग बेघर हो गए यह चक्रवात 912 एंबी के चरम तीव्रता पर पहुंच गया था इसलिए इसे उत्तर भारत का सबसे मजबूत उष्णकटिबंधीय चक्रवात कहा जाता है।

महान अकाल
वर्ष 1876-1878 में आये काल ने करीब 3 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान ले ली। पहले यह काल चीन में पहली बार शुरू हुआ था और वहां से चलतेचलते यह भारत में भी शुरू हो गया. आज भी यह भारत की अभी तक की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है।

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