भारत के लिए भी बड़ी टेंशन, म्‍यांमार में चीन और पाकिस्‍तान का ‘डर्टी आर्म्‍स गेम’ सामने आया

नई दिल्‍ली: पडोसी देशों में अस्थिरता फैलाने की चीनी कोशिशें भारत के लिए चिंता का सबब बन गई हैं। खासतौर से जिस तरह पूर्वी लद्दाख में चीन ने अतिक्रमण किया, उसे देखते हुए बांग्‍लादेश और म्‍यांमार में हो रहे बदलावों पर भी नजर रखनी पड़ेगी। ड्रैगन ने म्‍यांमार में उग्रवादियों की खूब मदद की है और यह किसी से छिपा नहीं। म्‍यांमार सेना के मेजर जनरल तुन तुन न्यी ने मीडिया से कहा था कि अराकान आर्मी और उसके साथी ग्रुप्‍स ने चीन से हथियार खरीदे हैं। वहां हाल ही में चीनी हथियारों की बड़ी खेप उग्रवादियों तक पहुंचाई गई है। म्‍यांमार आर्मी चीफ ने अपनी रूस यात्रा के दौरान इशारों में कहा था कि ‘कुछ मजबूत ताकतें’ आतंकवाद और उग्रवाद को बढ़ावा दे रही हैं।

चीन-पाकिस्‍तान नेक्‍सस का हुआ खुलासा
म्‍यांमार के दो उग्रवादी समूहों को चीन-पाकिस्‍तान का एक नेक्‍सस चीनी हथियार सप्लाई कर रहा था। मकसद था रकाइन में भारतीय ठिकानों पर हमला करना। यह ग्रुप न सिर्फ म्‍यांमार, बल्कि बांग्‍लादेश में भी आतंक को बढ़ावा दे रहा था। इसका भांडाफोड़ तब हुआ जब थाइलैंड-म्‍यांमार बॉर्डर से कुछ लोग पकड़े गए। उनके पास चीनी हथियारों का जखीरा मिला। बताया जाता है कि ये हथियार चीन की एक सरकारी कंपनी ने बनाए हैं। जखीरा बांग्‍लादेश के कॉक्‍स बाजार होते हुएभारत-बांग्‍लादेश-म्‍यांमार जंक्‍शन पर पर्वा के रास्‍ते म्‍यांमार में एंटर कराया गया।

भारत के लिए क्‍यों है चिंता की बात?
हथियार ले जा रहे ग्रुप को न तो बांग्‍लादेश आर्मी पकड़ सकी, न ही कोस्‍टल पैट्रोल्‍स। बॉर्डर गार्ड्स की नजर में भी वे लोग नहीं आए। घने जंगलों से गुजरते हुए जिस तरह उन्‍होंने हथियार पहुंचाए, पूरा प्‍लान्‍ड ऑपरेशन लगता है। अराकान आर्मी की सहयोगी काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी ऐसे इलाके में सक्रिय है, जहां से म्‍यांमार की चीन और भारत के साथ सीमाएं लगती हैं। खासतौर से अरुणाचल प्रदेश जिसे लेकर चीन दावा करता रहा है। नॉर्थ-ईस्‍ट के कई उग्रवादी समूहों का चीन से कनेक्‍शन रहा है। भारत और चीन के बीच तनाव से इन उग्रवादी समूहों का मन बढ़ सकता है कि वे हालात का फायदा उठाने के लिए कोई उल्‍टी-सीधी हरकत करें।

रकाइन में भारतीय प्रोजेक्‍ट में उग्रवादी डालते रहे अड़ंगा
अराकान आर्मी ने 10-11 मार्च को म्‍यांमार सेना की पोस्‍ट पर हमला कर 20 सैनिकों को मार दिया था। 2009 में स्‍थापित हुई अराकान आर्मी रकाइन स्‍टेट की आजादी चाहती है। वह बार-बार सितवे बंदरगाह के लिए बनने वाली रोड में अड़ंगा डालती है। रकाइन में भारत के कालादान प्रोजेक्‍ट साइट पर उग्रवादियों ने कई बार हमला किया है। चीन से उसकी नजदीकी इस बात से जाहिर होती है कि उसने चीन-म्‍यांमार इकनॉमिक कॉरिडोर (CMEC) को नुकसान पहुंचाने की कोई कोशिश नहीं की है। उन्‍हें चीनी हथियारों की सप्‍लाई होना भारत के लिए चिंता की बात है।

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