भारत बंद से डरी बीजेपी यूपी की दलित बस्ती में अपने सभी दलित नेताओं को उतारेगी

दिल्ली ब्यूरो: भारत बंद के दौरान दलितों के तेवर देख बीजेपी डर गयी है। दलितों का ऐसा तेवर कभी नहीं दिखा था। अधिकतर दलित समाज मान रहे हैं कि चुकी केंद्र में बीजेपी की सरकार है इसीलिए दलितों के विरोध में काम किया जा रहा है। जबकि बीजेपी बार बार यह कह रही है कि बीजेपी ना तो आरक्षण के विरोध में है और ना ही एससीएसटी कानून के विरोध में। लेकिन दलित समाज इसे मानने को तैयार नहीं। भारत बंद के बाद दलितों की हालत देख कर बीजेपी नए सिरे से काम करनी की योजना बना रही है ताकि दलित वोट छिटक ना जाए।

भाजपा को लग रहा है कि दलित वोट की बदौलत ही 2014 में बीजेपी को सत्ता मिली थी और अगर यह वर्ग नाराज हो गया तो बीजेपी को काफी नुक्सान हो सकता है। ऐसे में बीजेपी नयी राजनीति की तैयारी कर रही है ताकि दलितों की आस्था बीजेपी से डिग न पाए। बीजेपी ने खासतौर पर उत्तर प्रदेश के लिए एक रणनीति बनाई है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक रणनीति के तहत बीजेपी अपने 63 आरक्षित वर्ग वाले सांसदों को दलित मोहल्लों में उतारने जा रही है।

ये सांसद 14 अप्रैल से दलित मोहल्लों में जाएंगे। ये सांसद मोहल्लों में जाकर बताएंगे कि एससी/एसटी एक्ट में हो रहे बदलाव के लिए केन्द्र सरकार और बीजेपी जिम्मेदार नहीं है। ये एक अफवाह फैलाई जा रही है। सांसद जनता को ये भी बताएंगे कि भविष्य में सरकार आरक्षण के किसी भी मुद्दे को छेड़ने नहीं जा रही है। आरक्षण को खत्म करने वाली खबर भी एक अफवाह है और विपक्ष वाले इस तरह की राजनीति कर रहे हैं।

पहले चरण में बीजेपी का पूरा फोकस यूपी पर है।यूपी में इस रणनीति पर काम होने के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी ये 63 सांसद दलित गांवों और मोहल्लों में जाएंगे। ये वो राज्य हैं जहां भारत बंद का सबसे ज्यादा असर देखा गया था इसके अलावा इन राज्यों में दलितों की ख़ास संख्या भी है। दलितों के बीच जाकर बीजेपी के दलित सांसद दलितों को पार्टी के पक्ष में करने के लिए कई और तरह की बातें भी रखेंगे।

यूपी बीजेपी के महामंत्री अशोक कटारिया का कहना है कि ‘यूपी में 14 अप्रैल से सामाजिक समरसता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस दिन प्रदेशभर में बूथस्तर पर कार्यक्रम किए जाएंगे। ये कार्यक्रम डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती से जुड़े हुए होंगे। इस कार्यक्रम में हमारे सभी एमएलए, एमपी, पदाधिकारी भी शामिल होंगे। साथ ही 63 सांसदों को जिम्मेदारी अलग से दी गई है। ये सांसद 14 अप्रैल के बाद भी दलित बस्तियों और गांवों में जाएंगे और दलितों की समस्या को भी सुनेंगे।

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