भारत में एक ऐसी जगह जहां बच्चे के पैदा होते ही रिश्ता तय, पीछे हटे तो देना पड़ता है जुर्माना

भोपाल। मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में बंजारा समाज के पांच गांव ऐसे हैं, जहां बच्चों के जन्म लेते ही उनकी शादियां पक्की कर दी जाती हैं। बंजारा समाज पिछड़ा होने के बाद भी सरकार द्वारा बाल विवाह रोकने के लिए बनाए गए कानून का पालन करता है। भले ही बच्चा पैदा होते ही प्रथा को निभाते हुए रिश्ता तय कर देते है, लेकिन बच्चों के बालिग होने के बाद ही शादी करते है।

रिश्ता पक्का होने के बाद लड़के या लड़की वालों ने शादी से इनकार किया तो उसे रिश्ता तोड़ने के बदले में 95 हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ता है। इससे भी रोचक यह है कि यदि लड़का या लड़की घर से भागे या किसी और से संबंध रखे, तो उसे ढाई लाख रुपये तक का दंड भरना पड़ता है। बंजारा समाज के यह पांच गांव रामबाड़ी, भीकापुर, हनुमानखेड़ा, मल्होत्रा और सौभागपुरा हैं। यह गांव करीब चार किलोमीटर के दायरे में सटकर बसे हैं और श्योपुर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर हैं।

इन गांवों का बेटा या बेटी का संबंध इन पांच गांवों से बाहर कहीं नहीं किया जाता। इसलिए हर परिवार को पता रहता है कि किसके यहां कितने बच्चे है। किसके यहां कब बच्चा पैदा होने वाला है। इन गांवों में जितनों की भी शादियां हुई हैं, उनमें से किसी की शादी तीन दिन की उम्र में पक्की हो गई थी, किसी की चार, तो किसी की 10 दिन की उम्र में। कई जोड़े ऐसे हैं जिनमें पति अपनी पत्नी से दो दिन बड़ा है या फिर पांच दिन उम्र ज्यादा है।

लेकिन किसी कारणवश संबंध तोड़ना होता है तो उसका फैसला पंचायत करती है। पंचायत के सामने ही संबंध तोड़ने वाले हर्जाने के तौर पर दूसरे पक्ष को नकद रुपये देता है। इन्हें देना पड़ा जुर्माना: सौभागपुरा के ठाकरी बंजारा के बेटे बल्लू का संंबंध पांच दिन की उम्र में सौभागपुरा के ही गुलाब बंजारा की बेटी नानू से तय हुआ था, लेकिन बालिग होने के बाद बल्लू ने नानू से शादी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद संबंध तोड़ने के लिए पंचायत हुई, उसमें बल्लू के पिता ठाकरी को 95 हजार का जुर्माना लड़की वालों को देना पड़ा।

इसी प्रकार सौभागपुरा के ही गोली बंजारा के बेटे राकेश का संबंध घनश्याम बंजारा की बेटी फूलवती से हुआ। बाद में राकेश को फूलवती पसंद नहीं आई। इसके बाद पंचायत में संबंध तोड़ा गया और 25 हजार का जुर्माना अदा करना पड़ा। 5 साल पहले से शुरू हुई दंड प्रथा:बंजारा समाज में लड़के या लड़की के घर से भाग जाने या फिर शादी पक्की होने के बाद किसी और लड़की-लड़के से संबंध बनाने या घर से भाग जाने पर जुर्माना वसूलने की प्रथा तो कई पीढियों पुरानी है।

बचपन में हुई शादी को तोड़ने पर दंड भुगतने की प्रथा करीब पांच साल पहले ही शुरू हुई है। दरअसल बचपन में हुई शादियों के लगातार टूटने की घटनाओं से बंजारा समाज आहत था। समाज के बुजुर्गों ने बचपन में तय हुई शादियों को बचाने के लिए 95 हजार का जुर्माना लगाने की प्रथा शुरू कर दी। इसके बाद कई संबंध टूटने से बच गए, लेकिन पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी।

प्रथा से मुकरे तो और जुर्माना: यदि कोई शादीशुदा महिला या पुरुष घर से भागकर किसी दूसरी महिला या पुरुष के साथ घर बसा लेता है तो उसे भारी नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसा करने वालों को डेढ़ से ढाई लाख रुपये तक का जुर्माना तो भरना पड़ता ही है। इतना ही नहीं, समाज की व्यवस्था पर कलंक लगाने वाले ऐसे महिला या पुुरुष का घर तक ढहा दिया जाता है। बंजारा समाज के एक युवक ने पत्नी को छोड़ दूसरी युवती से शादी कर ली। इसके बाद समाज के लोगों ने उस युवक का घर तोड़ दिया।

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