भारत में घोटालों की कोई कमी नहीं, जब जिसको मौक़ा मिला उसने लूटा!

अखिलेश अखिल

नई दिल्ली ब्यूरो: बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद के लिए रांची की सीबीआइ कोर्ट से शनिवार को बेहद बुरी खबर आयी। दुमका कोषागार से निकासी से जुड़े केस संख्या आरसी 38ए /96 में लालू प्रसाद यादव को सीबीआइ के विशेष जज शिवपाल सिंह ने 14 साल के कारावास की सजा सुनायी। 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। आगे लालू प्रसाद की राजनीति क्या होगी कहना मुश्किल है। लेकिन एक बात तय है कि भारत में घोटालों की कोई कमी नहीं रही। जब जिसको मौक़ा मिला, सबने देश को लूटा और बच के निकलते चले गए। हमारे देश में आजादी के तुरंत बाद ही घोटाले शुरू हो गए थे। राष्ट्रीय स्तर पर तो घोटाले हुए ही हर राज्यों में भी बड़े बड़े घोटाले देखने को मिले हैं। आइये यहां कुछ बड़े घोटाले की चर्चा की जाय जिसने देश की राजनीति को प्रभावित किया था।

जीप घोटाला देश में होने वाला पहला घोटाला था। यह आजाद भारत का पहला घोटाला था। आजादी के बाद हुआ था यह घोटाला, जिसमें भारत सरकार ने एक लंदन की कंपनी से 2000 जीपों को सौदा किया था। सौदा 80 लाख रुपये का हुआ था, लेकिन केवल 155 जीप ही प्राप्त हुई थी। इस घोटाले में ब्रिटेन में मौजूद तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त वी.के. कृष्ण मेनन का हाथ होने की बात कही गयी लेकिन 1955 में केस को क्लोज कर दिया गया। कुछ दिन बाद ही मेनन नेहरू कैबिनेट में शामिल हो गये। कह सकते है कि भ्रष्टाचार की नींव यहीं से पड़ी थी।

दूसरा घोटाला मारुति घोटाला था। इस घोटाले में कंपनी बनने से पहले यहां एक घोटाला सामने आया था जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र हुआ था। मामले में पैसेंजर कार बनाने का लाइसेंस देने के लिए संजय गांधी की मदद की गयी थी। इसके बाद इंदिरा गाँधी के काल में एक और घोटाला भी सामने आया था। नागरवाला घोटाला के नाम से। बोफोर्स घोटाला के बारे में समय-समय पर देश में चर्चा होती रहती है। 1987 में एक स्वीडन की कंपनी बोफोर्स एबी से रिश्वत लेने के मामले में राजीव गांधी सहित कई बड़़े नेता का नाम आया। मामला था कि भारतीय 155 मिमी. के फील्ड होवित्जर के बोली में नेताओं ने करीब 64 करोड़ रुपये का घोटाला किया।

स्टॉक ब्रोकर केतन पारीख ने स्टॉक मार्केट में 1,15,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया। इस मामले में 2002 के दिसंबर महीने में इन्हें गिरफ्तार किया गया था। यूरिया घोटाला भी देश में हुआ। 26 मई, 1996 को 133 करोड़ रुपये घपले का मामला दर्ज किया गया था। प्रधानमंत्री नरसिंहराव के करीबी नेशनल फर्टिलाइजर के प्रबंध निदेशक सी.एस.रामाकृष्णन ने यूरिया आयात के लिए पैसे दिये थे, जो कभी नहीं आया। मामले में किसी को सजा नहीं हुई।

चारा घोटाला 1996 में बिहार में हुआ जो एक बड़ा घोटाला था जिसमें लगभग 360 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया था। मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित कई को आरोपी बनाया गया। 23 दिसंबर, 2017 को विशेष सीबीआई अदालत ने इस घोटाले के एक मामले में लालू यादव समेत 16 लोगों को दोषी करार दिया था। स्टांप की हेराफेरी कर अब्दुल करीम तेलगी ने लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का चूना देश को लगाया था। इसे स्टाम्प घोटाला के नाम से जाना गया। सत्यम घोटाले को कॉरपोरेट जगत में अबतक का सबसे बड़ा घोटाला माना जाता है।

आईटी कंपनी सत्यम कंप्यूटर सर्विस ने रियल इस्टेट और शेयर मार्केट के माध्‍यम से देश को लगभग 14 हजार करोड़ का चूना लगाया। कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में खेल के नाम पर जमकर लूट मची। मामले में लगभग 70 हजार करोड़ का घोटाला सामने आया। घोटाले के सूत्रधार आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी और उनके सहयोगी थे। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला से आप परिचित हैं ही। यह देश का एक बहुत बड़ा घोटाला है जो सन् 2011 के आरंभ में सामने आया था। इस घोटाले में पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा बुरी तरह से फंसे। 1.76 लाख करोड़ के इस चर्चित घोटाले ने पूरे देश में सनसनी मचा दी थी। हालांकि सीबीआई की एक विशेष अदालत ने घोटाले के सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

इसके अलावे भी देश में कई बड़े घोटाले हुए हैं। अटलविहारी वाजपेयी जब प्रधान मंत्री थे तब भी दर्जनों घोटाले सामने आये थे। देश में ऐसी कोई सरकार नहीं बानी जिसके काल में घोटाले नहीं हों। अभी वर्तमान में में बैंक लूट घोटाला से लेकर राफेल डील घोटाले को लेकर पक्ष -विपक्ष के बीच तलवारें खींची हुयी है।

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