भीषण जल संकट से जूझ रही है दुनिया की आधी आबादी

नई दिल्ली: दुनिया की बहुत बड़ी आबादी भीषण जल संकट से जूझ रही है। दुनिया की सरकारों को पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता बेहतर करने के लिए हरित नीति पर जोर देना चाहिए, क्योंकि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती वैश्विक जनसंख्या के चलते अरबों लोगों के सामने पानी का संकट पैदा हो गया है। चिंता की बात यह है कि यह संकट लगातार बढ़ता जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व जल विकास रिपोर्ट 2018 पेश करते हुए यह बात कही। रिपोर्ट में बताया गया कि दुनिया में 3.6 अरब लोग यानी आधी वैश्विक आबादी ऐसी है, जो हर साल कम से कम एक महीने पानी के लिए तरस जाती है। 22 मार्च को होने वाले विश्व जल दिवस से पहले यह रिपोर्ट पेश की गई है। रिपोट में चेतावनी दी गई है कि पानी की किल्लत झेल रहे लोगों की संख्या 2050 तक 5.7 अरब तक पहुंच सकती है।

यूनेस्को की महानिदेशक आद्रे अजोले ने ब्राजिलिया में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा अगर हमने कुछ नहीं किया तो 2050 तक पांच अरब से ज्यादा लोग ऐसे क्षेत्र में रह रहे होंगे, जहां पानी की आपूर्ति बेहद खराब होगी। रिपोर्ट के मुताबिक पिछली एक सदी में पानी की खपत छह गुना बढ़ी है। वहीं हर साल एक प्रतिशत पानी का इस्तेमाल बढ़ जाता है। जाहिर तौर पर जनसंख्या वृद्धि, आर्थिक विकास, उपभोग के तरीके में बदलाव से जरूरत ज्यादा बढ़ जाएगी। विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में यह मांग ज्यादा होगी।

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