भेल जैसी महारत्न कंपनी की अर्थव्यवस्था में मंदी आने के संकेत

भोपाल: भारत सहित दुनिया के कई देशों में आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के स्पष्ट संकेत दिख रहे है। यदि किसी अर्थव्यवस्था की विकास दर या जीडीपी तिमाही लगातार घट रही है तो इसे आर्थिक मंदी का बड़ा संकेत माना जाता है।

आर्थिक मंदी का दूसरा बड़ा संकेत यह है कि लोग खपत कम कर देते है तथा मंदी के दौरान लोग जरूरत की चीजों पर खर्च को भी काबू में करने का प्रयास करते है। मंदी के दौर में निवेश कम हो जाता है क्योंकि लोग कम कमाते है इस स्थिति में उनकी खरीदने की क्षमता घट जाती है और वे बचत भी कम कर पाते है।

भेल के लिये भी अर्थव्यवस्था में कमी अच्छे संकेत नही दे रहे है। आज भेल का मार्केट कैपिलाईजेशन सिर्फ 8 हजार करोड़ का रह गया है। 550 कंपनियों से बाहर हो गई है। आर्डर की कमी काम में कमी तथा कारखाने का वेतन भुगतान भेल के लिये समस्या बन चुका है। कारखाने का 23 प्रतिशत वेतन में जाना तथा क्रोडेट लेबर में अतिरिक्त व्यय कहां तक जायज है यह भेल के प्रबंधन को देखना पड़ेगा।

जब आर्थिक मंदी अगले 2 से 3 साल चलने के पूरे आसार है तब भेल को कई निर्णय लेने पड़ेंगे।अन्यथा भेल का अस्तित्व बहुत खतरे में दिखाई दे रहा है। खर्चां में कटौती के साथ भेल कर्मचारी अधिकारियों को भी इस संबंध में बहुत कुछ सोचना पड़ेगा तब कहीं जाकर मंदी के दौर से उभर पायेंगे।

बीडी न्यूज़ से साभार

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