मंत्रिमंडल का विस्तार शिवराज के तिरुपति से लौटने के बाद

भोपाल। मंत्रिमंडल का विस्तार अब अगले सप्ताह होने की संभावना है क्योंकि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की व्यस्तता के चलते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का दिल्ली प्रवास अब दो-तीन दिन के बाद होगा। ऐसा समझा जाता है कि मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले अधिकांश नामों पर तो सहमति बन गई है लेकिन कुछ नामों पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। सिंधिया समर्थक लोगों के नाम पर तो लगभग सहमति है किंतु असली दिक्कत भाजपा में से किसे लें और किसे छोड़ें इसको लेकर ही कवायद चल रही है। जगह कम है दावेदार अनेक है और लगभग सभी अनुभवी हैं। विभिन्न वर्गो, जातियों और क्षेत्रीय संतुलन बनाना भी असली चुनौती है।

विगत दिवस मुख्यमंत्री चौहान ने खुद कहा था कि दोपहर में मंत्रालय में उनकी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद विष्णु दत्त शर्मा एवं प्रदेश महामंत्री संगठन सुहास भगत से सभी पहलुओं पर चर्चा हो चुकी है और अब दिल्ली में चर्चा के बाद अनुमति मिलते ही मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के दिल्ली जाने की सूचना भी गई थी और वहां पर मध्य प्रदेश भवन का कोरोना को देखते हुए सैनिटाइजेशन भी कर दिया गया था। मुख्यमंत्री विगत रात्रि फिर भाजपा मुख्यालय पहुंचे और उनकी शर्मा और भगत से चर्चा हुई। समझा जाता है इस मुलाकात में भी विस्तार के मुद्दे पर बातचीत हुई। आज शिवराज हैदराबाद होते हुए तिरुपति बालाजी के लिए रवाना हो गए हैं और वहां से 27 जून को वापस आने के बाद फिर दिल्ली जाएंगे। इससे ही आभास होता है कि कुछ नामों पर अभी पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है और यह गुत्थी दिल्ली में ही समझेगी। यदि विस्तार की हरी झंडी मिल जाती है तो फिर कार्यवाहक राज्यपाल की नियुक्ति होगी और उसके बाद शपथ का समय तय होगा।

आखिर समय क्यों लग रहा है?

सिंधिया के द्वारा भाजपा की सदस्यता लेने के बाद 22 तत्कालीन विधायक विधानसभा से त्यागपत्र के बाद भाजपा में शामिल हुए थे उनमें से 9 से लेकर 10 को शिवराज की टीम में शामिल होना है जिनमें से तुलसीराम सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत मंत्री बन चुके हैं। अन्य दावेदार हैं :- प्रभु राम चौधरी, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, बिसाहूलाल सिंह, ऐदल सिंह कंसाना, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, हरदीप सिंह डंग और रणवीर जाटव। जहां तक भाजपा का सवाल है अनुसूचित जनजाति वर्ग से आदिवासी चेहरों में विजय शाह, प्रेम सिंह पटेल, देवी सिंह सैयाम, कुंवर सिंह टेकाम के नाम शामिल है। इस वर्ग से मीना सिंह मंत्री बन चुकी है। शाह के नाम पर हाईकमान को ऐतराज है, क्योंकि वह 15 साल में जो भाजपा के मंत्रीमंडल बने हैं लगभग सभी में शामिल हुए हैं।

हाईकमान इस बार जो लगातार कई सालों से मंत्री बनते रहे उनके स्थान पर उन पुराने और अनुभवी विधायकों को मौका देना चाहता है जो आज तक मंत्री नहीं बन पाए हैं। यही कारण है कि संतुलन बैठाने में अधिक मशक्कत हो रही है। समान्य वर्ग में भी चेहरों के चयन में इसी फार्मूले के कारण में काफी माथापच्ची है। सूत्रों के अनुसार अनुसूचित जाति वर्ग से हरिशंकर खटीक, देवेंद्र वर्मा, विष्णु खत्री के नाम पर चर्चा हुई और इनमें से ही नाम तय होने की संभावना है। अन्य दावेदार जुगल किशोर बागड़ी और गोपीलाल जाटव राज्यसभा चुनाव के मतदान में गफलत करने के कारण सूची से खुद ही बाहर हो गए हैं। सिंधिया समर्थकों में भी चार विधायक इस वर्ग से हैं जिनमें से सिलावट मंत्री बन चुके।

सामान्य वर्ग से नेता प्रतिपक्ष रहने के कारण गोपाल भार्गव और दलबदल को सफलता के मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले अरविंद सिंह भदौरिया, भूपेंद्र सिंह, रामपाल सिंह और विश्वास सारंग प्रमुख दावेदार है। वैसे देखने वाली बात यही होगी की भोपाल से सारंग या रामेश्वर शर्मा, तथा बुंदेलखंड से भूपेंद्र सिंह और गोपाल भार्गव में से किसे जगह मिलेगी। विंध्याचल में जहां से भाजपा को 2018 के विधानसभा चुनाव में सबसे अच्छी सफलता मिली थी वहां से राजेंद्र शुक्ला, गिरीश गौतम, केदारनाथ शुक्ला में से किसे जगह मिल पाती है। सामान्य वर्ग से जो अन्य दावेदारों के नाम सामने आए हैं उनमें उषा ठाकुर, रमेश मेंदोला, यशपाल सिसोदिया, ओमप्रकाश सकलेचा, अजय विश्नोई, चैतन्य कश्यप, आदि के नाम शामिल है।

अन्य पिछड़ा वर्ग से जो प्रमुख दावेदार है उनमें यशोधरा राजे सिंधिया, भूपेंद्र सिंह, रामकिशोर कांवरे, राम खेलावन पटेल, भारत सिंह कुशवाहा आदि शामिल हैं। देखने वाली बात यही होगी कि क्षेत्रीय जातिगत और नए पुराने यानी जो पहले मंत्री रह चुके हैं और उन विधायकों जो अभी तक मंत्री नहीं बन पाए हैं उनमें सामंजस्य बैठाने की महारत शिवराज दिखा पाएंगे या नहीं। देर लगने का एक कारण यह भी है कि शिवराज उपचुनाव की पूर्व बेला में ऐसा कुछ नहीं करना चाहते जिससे नए सिरे से कुछ असंतोष पैदा हो। राज्यसभा चुनाव में अपने संख्या बल से दो मत कम मिलने के कारण विस्तार के सभी पहलुओं पर गंभीरता पूर्वक मंथन किया जा रहा है। इसका मकसद यही है कि ऐसी टीम बनाई जाए जो उपचुनाव में मददगार हो।

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