मगरमच्छ के मल से लेकर नींबू तक, ऐसे-ऐसे थे पुराने दौर के गर्भनिरोधक !

नई दिल्ली: आज के समय में तो किसी भी लड़की के एबॉर्शन के लिए कई तरह के मेडिकल ट्रीटमेंट या दवाईयां आ गई हैं जिसके जरिये वो अपने गर्भ में पल रहे बच्चे को अबो्र्ट कर सकती हैं लेकिन पुराने समय में ये कुछ भी नहीं हुआ करता था. पहले के दौर में तो एबॉर्शन करने के ऐसे-ऐसे उपाय किये जाते थे जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे.

आज विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि अब नई तकनीकों के जरिये इस दुनिया में लगभग हर चीज़ संभव है लेकिन एक समय वो भी था जब इन तकनीकों का इजाद भी नहीं हुआ था. पहले के समय में किसी भी काम को करने के लिए अलग-अलग अजीबोगरीब तरीके अपनाए जाते थे. अगर बात करें गर्भधारण रोकने की तो इस युग में तो बहुत सी तकनीकों और दवाइयों के जरिये इसे रोका जा सकता है लेकिन प्रचीन समय में ना कोई तकनीक होती थी और ना ही दवाइयां. पहले के समय में गर्भधारण रोकने के लिए ऐसे-ऐसे तरीके अपनाये जाते थे जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे. प्राचीन समय में गर्भधारण रोकने के लिए इन चीज़ों का किया जाता था इस्तेमाल-

नींबू
प्राचीन समय में गर्भपात करने के लिए महिलाएं नीम्बू का इस्तेमाल करती थी. ऐसा इसलिए किया जाता था क्योंकि नीम्बू में सिटरस एसिड होता है जो स्पर्म को बहुत जल्दी नष्ट कर देता है. आपको बता दें नीम्बू का इस्तेमाल खतरनाक साबित होता था क्योंकि ये महिला की योनि को नुकसान पहुँचता था.

मगरमच्छ का मल

इस नाम को सुनकर ही घिन आ रही हैं लेकिन पहले के समय में तो महिलाए गर्भधारण रोकने के लिए महिला की योनी में मगरमच्छ का मल, शहद और सोडियम बाइकारबोनेट का घोल बनाकर उसमे डाला जाता था. जी हाँ. सुनकर ही आपको घिन आ रही होगी लेकिन ये सच हैं. ऐसा माना जाता था कि इस घोल को अंदर डालने से शुक्राणु अंदर नहीं जा पाते और कभी कुछ शुक्राणु अंदर चले भी गए तो वो नष्ट हो जाते थे.

जानवरों की मदद

जिस भी महिला का एबॉर्शन करना होता था उसकी जांघो (थाइस) पर वीजल नाम के एक जानवर का अंडाशय और एक हड्डी बांध दी जाती थी. ऐसा करने से महिला प्रेग्नेंट नहीं होती थी. हो गए ना हैरान लेकिन सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि कनाडा में तो बीवर नाम के एक जानवर के अंडाशय को शराब में डुबोकर महिला को खिलाया जाता था. ऐसा करने से पेट में पल रहा बच्चा नष्ट हो जाता था.

लोहे का पानी
ग्रीस में ऐसा माना जाता था कि अगर किसी महिला को वो पानी पिलाया जाये जिसमे लोहार अपने औजार ठन्डे करता है तो योनि से शुक्राणु नष्ट हो जाते थे. प्राचीन समय में ऐसा माना जाता था कि इस पानी को पीने से महिला गर्भवती नहीं होती थी.

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