मजदूरों से बदसलूकी के वायरल वीडियो पर बदायूं पुलिस ने मांगी माफी, बैग लादकर पैदल जा रहे थे घर

लखनऊ: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें बदायूं पुलिस का एक सिपाही कुछ मज़दूरों को रोककर पंजों के बल आगे बढ़ने को कह रहा है. दरअसल कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए किए गए लाॅकडाउन के कारण दिल्ली से सैकड़ो मजदूर यूपी, बिहार की ओर निकल पड़े हैं. ऐसे ही कुछ मजदूर गुरुवार को बदायूं पहुंचे तो उन्हें एक सिपाही ने रोक लिया.

Prashant Srivastava

@Prashantps100

यूपी के बदायूं जिले का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जहां पुलिस बाहर से घर लौट रहे युवाओं से कुछ ऐसे बर्ताव कर रही है @ThePrintIndia @ThePrintHindi

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दिप्रिंट को मिली जानकारी के मुताबिक चार मजदूरों को रोककर पंजों के बल आगे बढ़ने को कहा गया और जमकर फटकार लगाई गई. लेकिव जब ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस बैकफुट पर आ गई. बदायूं पुलिस की ओर से पहले कहा गया कि प्रकरण में अपर पुलिस अधीक्षक नगर जनपद बदायूं द्वारा जांच की जा रही है, जांच के बाद प्रकाश में आये तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.

इसके बाद बदायूं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत कहा कि इस घटना के लिए माफी मांगी है और कहा है कि जिला पुलिस शर्मिंदा हैं. उनके मुताबिक ये एक अंडर ट्रेनिंग सिपाही ने इसे अंजाम दिया था, जिसपर कार्रवाई की जाएगी.

वरुण 🇮🇳

@varungrover

क्या भारत सिर्फ़ उनका है जिनके पास अपने घर और ताकत हैं?
क्या मज़दूर शहर से 300km पैदल चलकर वापस अपने गाँव भी ना जाये ?
क्या सरकार चाहती है ये शहरों में ही भूखे मर जाएं, एक ऐसे कीटाणु की खातिर जिसका उन्हें पता भी नहीं।
(Video from Badaun, UP via @Zebaism)

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इस वायरल वीडियो को ट्वीट करते हुए फिल्म लेखक वरुण ग्रोवर ने ट्विटर पर लिखा है, ‘क्या भारत सिर्फ उनका है जिनके पास अपने घर और ताकत हैं? क्या मजदूर शहर से 300 किमी पैदल चलकर वापस अपने गांव भी ना जाये? क्या सरकार चाहती है ये शहरों में ही भूखे मर जाएं, एक ऐसे कीटाणु की खातिर जिसका उन्हें पता भी नहीं.’

वापस आ रहे श्रमिकों को उनके घर पहुंचाएं : कांग्रेस

यूपी कांग्रेस चीफ अजय लल्लू ने बयान जारी कहा है कि हजारों श्रमिक अपने घरों की तरफ लौटने को मजबूर हैं. लेकिन सरकार द्वारा यातायात के सारे साधनों की पूर्ण बन्दी के कारण ये पैदल ही अपने परिवार- जिसमें महिलाएं एवं बच्चे भी हैं के साथ सैंकड़ों किलोमीटर पैदल यात्रा कर रहे हैं. इनके पास रास्ते में खाने-पीने और पैसे की कमी है, ऐसे में भूखे पेट ही सफर करने को विवश हैं. इनमें छोटे बच्चे यहां तक कि 8 माह के बच्चों के लिए दूध की भी व्यवस्था नहीं है.

लल्लू के मुताबिक, ‘लाॅकडाउन से पहले सरकार की तैयारियों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है. केंद्र व यूपी की सरकार से सवाल है कि वापस आ रहे ऐसे लोगों को तत्काल चिन्हित कर इनके खान-पान की व्यवस्था की जाए. साथ ही साथ नगद आर्थिक मदद करते हुए इनको घरों तक सकुशल पहुंचाने की व्यवस्था की जाए. घरों तक पहुंचाने के पहले इन लोगों की कोविड-19 की जांच की जाए.’

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