मटके के पानी से लगाएं दिल

नई दिल्ली: गर्मी में मटके का पानी जितना ठंडा और सुकूनदायक लगता है, स्वास्थ्य की दृष्टि से उतना ही फायदेमंद भी होता है। गर्मी के दिनों में फ्रिज का ठंडा पानी पीने की बजाय मटके का पानी पीना ही बेहतर है। अगर मटके का पानी नियमित रूप से पीया जाए, तो रोग प्रतिरोधक क्षमता (रोगों से लडऩे की क्षमता) बढ़ जाती है। यदि प्लास्टिक की बोतलों में पानी स्टोर करते हैं, तो प्लास्टिक पानी को अशुद्ध कर देता है, जो शरीर के लिए हानिकारक है।

नियमित रूप से मटके के पानी का सेवन करने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोन का स्तर उच्च होता है। मटके के क्षारीय गुण, पानी की अम्लता के साथ मिलकर, उचित पीएच संतुलन प्रदान करते हैं। यह एसिडिटी पर रोक लगाने और पेट दर्द से राहत प्रदान करता है। मिट्टी के बर्तन में रखा पानी पीने से फोड़े, फुंसी, मुंहासे और अन्य त्वचा संबंधित कई रोग दूर हो जाते हैं। त्वचा भी दमकने लगती है। इसके अलावा मटके का पानी ब्लड प्रेशर को तो नियंत्रित करता ही है, कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक है। मिट्टी के बर्तन में रखा पानी अपने एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण डायरिया, पीलिया, डायसेंट्री जैसी बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।

एक्सपर्ट कहते हैं कि मिट्टी में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसलिए मिट्टी से बने पात्र में रखे पानी को पीने से शरीर में दर्द, ऐंठन या सूजन जैसी समस्याओं से निजात मिलती है। गठिया रोग में भी बेहद लाभकारी माना जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि मिट्टी के बर्तन में रखे पानी में अनेक कैंसर-विरोधी तत्व मौजूद होते हैं। मटके में रखा पानी पीने से गला खराब नहीं होता। जब भी फ्रिज का ठंडा पानी पीते हैं, तब गले की कोशिकाओं का ताप सामान्य होता है और ठंडा पानी पीते ही अचानक कम हो जाता है, जिससे गला खराब होने की आशंका बढ़ जाती है।

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