मथुरा-वृंदावन में होली पर कुछ ऐसा नजारा, चहुंओर छाया उल्लास

होली पर मथुरा-वृंदावन में हर बार तरह इस बार भी अजब माहौल दिखा। रंग, गुलाल, हंसी, ठिठोली में सराबोर चहुंओर खुशी का माहौल है, क्या बच्चे, क्या बूढ़े, क्या जवान हर जुबान पर सिर्फ और सिर्फ उल्लास छाया है। यह नजारा दिखा मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में।

आपको बता दें कि ब्रज की होली का अलग ही महत्व है। होली पर देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु मथुरा-वृंदावन में आते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु एक अलग ही छवि मन में लेकर जाएं, इसके लिए नगर आयुक्त अनुनय झा ने रंगोली सजाने का पूरा प्लान तैयार किया था।

वहीं  प्रहलाद नगरी गांव फालैन में  रविवार की सुबह से ही प्रहलाद कुंड मेला स्थल के पास धमार गायन शुरू हो गया। विशालकाय होलिका जिसका आकार व्यास में करीब 14-30 का है। पांचों गावों की सरदारी ने अपने-अपने घरों से कंडा, गूलरी मालाओं से होलिका को विशाल रूप दे दिया।

प्रहलाद नगरी गांव फालैन में आज एक बार फिर वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वाहन होगा। जिसके देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु गवाह बनेंगे। क्योंकि आज ही के दिन गांव फालैन में करीब 14-30 फुट व्यास की धधकती आग से होकर दूसरी बार मोनू पंडा प्रवेश कर बाहर आएगा।

मेला कमेटी के अध्यक्ष उदयचन्द ने बताया कि रविवार दोपहर से ही पंडा अपने जप पर बैठ गया और शाम करीब पांच बजे से ही श्रद्धालुओं का गांव पहुचना शुरू हो गया। शाम से ही धमार गायन बाहर से आए गायक कलाकारों द्वारा शुरू कर दिया गया एवं देर रात को ही ग्रामीणों द्वारा रखी गई होलिका की फालैन, सुपाना, राजागढ़ी, वरचावली, नगला आदि पांच गांव के लोगों ने आकर पूजा की और गांव में निकलने वाले पंडा के सामने रौद्र रूप न धारण करने की प्रार्थना की। रात ढलते ही पंडा ने नगाड़ा, ढोलक, मजीरा आदि के साथ गाते बजाते पांचों गावों के नर-नारियों के साथ होलिका की परिक्रमा की और लग्न अनुसार पंडा के संकेत के अनुसार दीपक जलाया गया।

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