मनुस्मृति पर चल रही है भाजपा : साध्वी सावित्री बाई फुले

अखिलेश अखिल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बहराइच से भाजपा की सांसद हैं साध्वी सावित्री बाई फुले। साध्वी फुले सांसद तो भाजपा की हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी की मौजूदा राजनीति उन्हें नहीं सुहाती। वह भारतीय संविधान की पैरोकार हैं और धर्म-आस्था को लेकर चल रहे खेल की मुखर विरोधी भी हैं। उनके विरोधी स्वर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को घायल करते हैं, तो पीएम नरेंद्र मोदी भी मर्माहत हो जाते हैं। साध्वी किसी का नाम नहीं लेतीं, लेकिन मौजूदा राजनीति करने वाले नेताओं को छोड़ती भी नहीं। पेश हैं सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले से कई मसलों पर हुई लंबी बातचीत के मुख्य अंश।

– आप संविधान को लेकर कुछ ज्यादा ही मुखर हैं। क्या बाबा साहब ने जो संविधान बनाया उसका पालन नहीं हो रहा?

अगर बाबा साहब का पूरा संविधान लागू हो जाए, तो देश ही बदल जाएगा। लेकिन ऐसा हो कहां रहा है। जिस संविधान की बदौलत न्यायपालिका और कार्यपालिका चल रही है, आज तक वह संविधान क्यों नहीं लागू किया गया? अगर कोई दलित भाई घोड़े पर सवार होकर शादी करने जाता है, तो उसे मौत के घाट उतार दिया जाता है। आज प्रदेश में बाबा साहब की मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं। संविधान की प्रतियां जलाई जा रही हैं। संविधान जलाने वाले कौन हैं? मनुस्मृति पर चलने वाले लोग ही तो हैं। और सरकार मौन है। क्या संविधान में यही लिखा है? क्या सरकार को ऐसे लोगों को दंडित नहीं करना चाहिए। मौजूदा सरकार वोट बैंक की खातिर संविधान को भी बदलना चाहती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हम इसकी लड़ाई लड़ेंगे। हमें राजनीति करने की फिक्र नहीं। याद रहे मैं बाबा साहब और कांशी राम की बेटी हूं। संविधान से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता।

– हाल ही में योगी जी ने इलाहाबाद का नाम बदला। क्या आपको नहीं लगता कि योगी जी ने बेहतर काम किया है?

देखिए हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष है। सभी धर्मों का यहां सम्मान है और सबकी आस्था का सम्मान करना चाहिए। ऐसा संविधान में ही दर्ज है। किसी की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। हमारा देश बहुसंख्यक आबादी, दलित, पिछड़ों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों का है। इस देश के निर्माण में इनके योगदान सबसे अधिक हैं। इनके नाम पर बहुत सी जगहों के नाम रखे गए हैं। तो क्या उस नाम को बदल देना ठीक है? यह गलत परंपरा है, अन्याय है। इस देश का बड़ा इतिहास इन बहुसंख्यकों के नाम ही है। जिसने इलाहाबाद का नाम बदला, उसे सोचना चाहिए कि इससे देश का बड़ा वर्ग दुखी है।

आजादी की लड़ाई में सभी ने भाग लिया था, बलिदान दिया था। फिर किस आधार पर आप नाम बदल देंगे। एक तरफ देश में रोजगार नहीं हैं। लोगों की बीमारी ठीक नहीं हो रही। देश कई आंतरिक समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन इनको नाम बदलने की राजनीति सूझ रही है। ये लोग कई शहरों के नाम बदलने पर तुले हैं। लगता है कोई काम ही नहीं है इनके पास। अपने लोगों, अपने धर्म के नाम पर जगहों के नाम रख रहे हैं। यहां यही सरकार है? क्या यही हमारे संविधान में दर्ज है? जो लोग संवैधानिक पद पर बैठे हैं, उन्हें सबका सम्मान करना चाहिए। उनकी नजर में सब बराबर हों।

– आखिर नाम बदलने से आपको क्या तकलीफ है? केंद्र से राज्य तक आपकी ही तो सरकार है?

कौन कहां है, इससे कोई मतलब नहीं। क्या यह देश मुसलमानों, दलितों और पिछड़ों का नहीं है। क्या उनका कोई योगदान नहीं? अगर यह सरकार सबका सम्मान करती, तो नाम बदलने का खेल नहीं होता। जब तक सबको बराबर का सम्मान नहीं मिल जाता, लड़ाई जारी रहेगी और तब तक कहा जाएगा कि सरकार संविधान के विरुद्ध काम कर रही है।

– क्या आपको भाजपा से परेशानी है?

मेरी कोई परेशानी नहीं। लेकिन इतना साफ है कि भाजपा मनुस्मृति को मानती है और उसे आगे बढ़ा भी रही है। इस सोच की वजह से समाज में गैरबराबरी है, समस्याएं हैं। ना कोई नौकरी है ना कोई रोजगार। जो लोग मनुस्मृति को मानते हैं उन्हें संविधान में कोई यकीन नहीं। मैं संविधान को मानती हूं और चाहती हूं कि देश और समाज संविधान के अनुरूप चले। और ऐसा हो गया तो देश का विकास होगा। पिछड़ों को उचित कोटा क्यों नहीं मिल रहा? दलितों को आरक्षण का लाभ क्यों नहीं मिल रहा? संविधान में सब दर्ज है, लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही। फिर हंगामा तो होगा ही। सरकार एक खेल के तहत आरक्षण को समाप्त करने में लगी है, जो हम नहीं होने देंगे।

– तो क्या आप मानती हैं कि मोदी और योगी संविधान को नहीं मानते? जैसा कि आपने खुद कहा है कि जो मनुस्मृति को मानेगा वह संविधान नहीं मानता।

मैं किसी का नाम लेना नहीं चाहती। लेकिन जो मैं कह रही हूं वही सच है। देश अभी संविधान पर नहीं चल रहा। और यह भी सच है कि भाजपा मनुस्मृति को आगे बढ़ा रही है। और हां, मैं कोई भाजपा विरोधी नहीं। अपने अधिकार की मांग करना अगर विरोध है, तो यह जारी रहेगा। चाहे जो कुछ कर लें। जो संविधान को नहीं मानेगा, उसका विरोध जारी रहेगा।

– आप भाजपा के नाम पर और खासकर मोदी जी नाम पर ही चुनाव जीत पाईं, लेकिन पार्टी में रहकर पार्टी से बैर?

पहले तो मैं किसी का बैरी नहीं। मैं बाबा साहब के बनाए संविधान की बात कर रही हूं। उस पर ही देश को चलना चाहिए। वह संविधान दुनिया में बेजोड़ है और उसमे सबका कल्याण निहित है, लेकिन बहुसंख्यक समाज को उसका लाभ नहीं मिल रहा। और जहां तक मेरे चुनाव लडऩे की बात है, मैं साफ कर दूं कि बहराइच सुरक्षित सीट है। वहां मेरे चाहने वाले लोग हैं। मैं किसी के नाम पर चुनाव नहीं जीत पाई हूं। पार्टी को अगर ऐसा लगता है, तो लगे। फिर आगे पार्टी को जो सोचना है, सोचे।

– तो क्या आप बसपा के साथ फिर जाने वाली हैं?

मैं कही नहीं जाने वाली हूं। मैं बाबा साहब की बेटी हूं। अपनी लड़ाई लडऩा जानती हूं। पार्टी में रहकर ही अपनी बात करती रहूंगी। देखिए सब कुछ बदल जाता है। झूठ की खेती ज्यादा दिनों तक नहीं चलती। देश पर वही राज करेगा, जो बहुजन की बात करेगा। हमारा एक ही नारा है कि भारत का संविधान लागू करो, वरना कुर्सी खाली करो।

– क्या पीएम मोदी और सीएम योगी से आपको चिढ़ है?

चिढ़ किस बात की। मैं हक की लड़ाई लड़ रही हूं। झूठ की राजनीति से पर्दा हटा रही हूं। बहुजन समाज की बात कर रही हूं। पार्टी के भीतर जो लोग नहीं बोलते, वे गुलाम ही तो हैं। मैं उन गुलामों में शामिल नहीं। जिसे जो करना है करे। मैं अपनी बात करती रहूंगी। बहुत सारे नेताओं ने बाहुत सारे वादे किए हैं। पुरे क्यों नहीं करते?

– क्या सरकार के खिलाफ आप 16 दिसम्बर को लखनऊ में रैली कर रही हैं?

किसी के खिलाफ यह रैली नहीं है। अपनी मांग को लेकर यह रैली है। बहुजन समाज पर हो रहे अत्याचार, शोषण और अन्याय के खिलाफ यह रैली है। उसी दिन सरकार को भी पता चल जाएगा कि बहुजन की क्या ताकत है। हम रैली में संविधान को हूबहू लागू करने की मांग करेंगे। सरकार क्या करती है, इस पर हमारी नजर रहेगी और इसके बाद देखेंगे।

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