मन की पीड़ा का इजहार और निशाना साधने का सहारा बना ट्वीटर

मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों ट्वीटर राजनेताओं के मन की पीड़ा का इजहार करने और एक-दूसरे पर बिना नाम लिए निशाना साधने का मुफीद सहारा बनता जा रहा है। इसके माध्यम से आजकल भाजपा और कांग्रेस के नेता एक-दूसरे पर निशाना साधते हुए तीरंदाजी कर रहे हैं तो कुछ नेता सिद्धान्तों की याद दिलाते हुए भाजपा को इशारे ही इशारे में गलत राह पर बढ़ने के प्रति चेता रहे हैं। भाजपा नेता और पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विजेन्द्र सिंह सिसोदिया ने चाणक्य के कथन का सहारा लेते हुए इशारों ही इशारों में भाजपा को ट्वीटर के माध्यम से सीख दी है।

अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है कि सत्ता व सिद्धान्त राजनीति रुपी रथ के दो चक्के हैं। इनके बिलकुल बराबर होने पर लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ा जा सकता है। मात्र सिद्धान्त का पोषण रथ की गति कम करता है, परन्तु वहां सत्ता की चाह रथ को विपरीत मार्ग की ओर ढकेल देती है। सिसोदिया भाजपा के काफी पुराने नेता हैं और अनेक पदों पर रहे हैं, उन्होंने अपने ट्वीट में जो कुछ कहा है वह मध्यप्रदेश की मौजूदा राजनीति पर सटीक बैठता है। मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन के लिए जो कुछ हुआ है उसकी ओर इशारा करते हुए उन्होंने बिना पार्टी का उल्लेख किए उसे चेताया है कि उसका रथ विपरीत मार्ग की ओर ढकेल दिया गया है।

उनका इशारा भाजपा की ओर है क्योंकि उसने ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके साथ 22 कांग्रेसी विधायकों को भाजपा में शामिल कर लिया और 14 गैर-विधायकों को मंत्री भी बना दिया है। इन सबको उपचुनाव जीत कर अभी विधायक बनना है। नीमच के एक सामाजिक कार्यकर्ता बालचन्द्र वर्मा ने शिवराज को पत्र लिखकर मांग की है कि उसे भी मंत्री बना दिया जाए, जिस तरह 14 आम नागरिकों को मंत्री बनाया गया है, क्योंकि वे भी आम नागरिक हैं, या तो इन्हें हटा दिया जाए या मुझे भी मंत्री बनाया जाए।

भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री विधायक अजय विश्‍नोई ने आज फिर एक ट्वीट करते हुए बिना शिवराज का नाम लिए कहा है कि पहले मंत्रियों की संख्या और अब विभागों का बंटवारा। मुझे डर है कि कहीं भाजपा का आम कार्यकर्ता हमारे नेता की इतनी बेइज्जती से नाराज ना हो जाए कि इससे पार्टी का नुकसान हो जाए। शिवराज को अपने मंत्रिमंडल के गठन में जितनी मशक्कत करना पड़ी और विभागों के वितरण में जितनी अड़चने उनके सामने पेश आईं, उन हालातों को ही विश्‍नोई का ट्वीट बयां कर रहा है। इस पर कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने इस बात को आगे बढ़ाते हुए ट्वीट में लिखा है कि पहले कांग्रेस का नुकसान हुआ, अब निश्‍चित रुप से भाजपा की बारी है, बिलकुल सही हैं अजय भाई। कांग्रेस नेता और ग्वालियर-चम्बल संभाग के लिए नियुक्त मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा ने अपने ट्वीट में कहा है कि सलाम, भाजपा में संघर्ष की कोख से जन्मे विधायक अजय विश्‍नोई, आपने अपने अदम्य साहस को सार्वजनिक कर आम कार्यकर्ता की उद्वेलित भावना को संरक्षित किया।

हम जिन्दा हैं तो जिन्दा होने का प्रमाण भी देना चाहिये, गद्दारों-बिकाऊओं के आगे घुटने मत टेकिए, आपने संस्कारधानी का नाम बढ़ाया है। एक निजी चैनल से चर्चा करते हुए वरिष्ठ मंत्री गोपाल भार्गव ने बेबाक बयान देते हुए कहा है कि कोई साधु-सन्तों की जमात नहीं, सबकी अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं, इसलिए विभागों के बंटवारे में देरी हो रही है। भार्गव ने यह बात सिंधिया समर्थकों की तरफ इशारा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि वे अपने दल के नेतृत्व से चर्चा कर चाहते हैं कि अच्छा विभाग मिले इसी से विलम्ब हो रहा है और विभाग का बंटवारा कब होगा, इस प्रश्‍न का सही उत्तर मुख्यमंत्री ही दे सकते हैं। मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत की एक सभा में पैसे बांटने का वीडियो वायरल होने की बात सामने आने के बाद उसका बचाव करते हुए भार्गव ने कहा कि गरीब कार्यकर्ता है यदि पचास या सौ किलोमीटर दूर से आता है तो उसे पेट्रोल के लिए पैसे दिए जाते हैं तो इससे क्या होता है, सौ रुपये किसी को दे भी दिए तो इसकी क्या कीमत है क्या यह बड़ी घटना हो गयी। कांग्रेस ने इसे एक मुद्दा बनाया है क्योंकि राजपूत के क्षेत्र में उपचुनाव होना है और वे खुद ही भाजपा उम्मीदवार भी होंगे। कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा है कि जनता में लालच की खुरचन बांटना अनैतिक है।

उनका कहना है कि जनता के सवालों और जनभावनाओं से डर कर बिकाऊलालों ने नये-नये पैंतरे आजमाना शुरु कर दिया है। मुख्यमंत्री चौहान बार-बार कहते रहे हैं कि कमलनाथ सरकार ने कर्ज माफी के नाम पर किसानों को धोखा दिया था, इस पर ट्वीट करते हुए उस सरकार में कृषि मंत्री रहे सचिन यादव ने तो यहां तक कह डाला कि लगता है शिवराज सिंह चौहान पूरी तरह से झूठराज सिंह चौहान में तब्दील हो चुके हैं, पहले कहते थे कमलनाथ सरकार ने कर्ज माफी के नाम पर किसानों को धोखा दिया, फिर कहा 6000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया और आज कुछ और कह दिया, पता नहीं उनके शरीर में कब और किसकी आत्मा आ जाती है। जिनके परिवार के ही कर्ज माफी के प्रमाण उनकी ही स्वीकारोक्ति के साथ सार्वजनिक हो चुके हैं, वह कितना और झूठ बोलेंगे।

और अन्त में………..

पहले दादा कमलनाथ के साथ हमेशा रहने की बातें करने वाली बसपा विधायक रामबाई अक्सर चौंकाने वाले बयान देती रहती हैं। उनका ताजा बयान सामने आया है कि जिसकी सरकार रहेगी मैं उसके साथ रहूंगी, इस प्रकार अभी से उपचुनाव के नतीजों से पहले ही रामबाई ने संकेत दे दिया है कि मध्यप्रदेश की जनता जो फैसला करेगी और जिसकी सरकार रहेगी वे उसी के साथ रहेंगी। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के सांसद बेटे नकुल नाथ के निशाने पर भी टाइगर आ गया है और उन्होंने बिना नाम लिए कहा है कि माइक के पीछे और कैमरे के सामने आकर कोई टाइगर नहीं बनता, टाइगर तो जंगल और मैदान में दिखते हैं। शिवराज और भाजपा नेताओं द्वारा कमलनाथ सरकार पर किसान कर्ज माफी के नाम पर किसानों को धोखा देने संबंधी आरोपों पर भी नकुल नाथ कहते हैं कि किसान कर्ज माफी का प्रमाण पत्र हम बीजेपी से नहीं लेना चाहते। 24 विधानसभा उपचुनावों में किसानों की कर्ज माफी एक बड़ा मुद्दा बनेगी और नतीजों से ही पता चलेगा कि मतदाता किसकी बातों पर अधिक भरोसा करता है।

अरुण पटेल/सुबह सबेरे से साभार

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