मन की बात: मोदी ने जीएसटी को बताया दुनिया का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने 45वें रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस बार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का जिक्र किया। पीएम ने इसे दुनिया का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म बताया। प्रधानमंत्री ने जीएसटी लागू होने की घटना को देश में इंस्पेक्टर राज, चेकपोस्ट के युग के खत्म होने की शुरुआत बताया। साथ ही तकनीकी के उपयोग से पारदर्शिता बढ़ने की जानकारी दी। जीएसटी के सफलतापूर्वक लॉन्च और उसकी सफलता के लिए पीएम मोदी ने राज्यों की सरकारों को धन्यवाद दिया और उनके सहयोग की सराहना की।

रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी को एक साल पूरा होने वाला है ‘एक देश, एक कर’ देश के लोगों का सपना था, वो आज हक़ीक़त में बदल चुका है। एक देश, एक कर सुधार, इसके लिए अगर मुझे सबसे ज्यादा किसी को क्रेडिट देना है तो मैं राज्यों को क्रेडिट देता हूं। जीएसटी कॉपरेटिव फेडरेलिज्म का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां सभी राज्यों ने मिलकर देशहित में फ़ैसला लिया और तब जाकर देश में इतना बड़ा टैक्स रिफॉर्म लागू हो सका। अब तक जीएसटी काउंसिल की 27 बैठकें हुई हैं और हम सब गर्व कर सकते हैं कि भिन्न-भिन्न राजनीतिक विचारधारा के लोग वहां बैठते हैं, भिन्न-भिन्न राज्यों के लोग बैठते हैं, अलग-अलग प्राथमिकता वाले राज्य होते हैं लेकिन उसके बावजूद भी जीएसटी काउंसिल में अब तक जितने भी निर्णय किये गए हैं, वे सारे के सारे सर्वसहमति से किये गए हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि जीएसटी से पहले देश में 17 अलग-अलग प्रकार के टैक्स हुआ करते थे लेकिन इस व्यवस्था में अब सिर्फ़ एक ही टैक्स पूरे देश में लागू है। जीएसटी ईमानदारी की जीत है और ईमानदारी का एक उत्सव भी है। पहले देश में काफ़ी बार टैक्स के मामले में इंस्पेक्टरराज की शिकायतें आती रहती थी। जीएसटी में इंस्पेक्टर की जगह आईटी ने ले ली है। रिटर्न से रिफंड तक सब कुछ ऑनलाइन सूचना प्रौद्योगिकी के द्वारा होता है। जीएसटी के आने से चेकपोस्ट ख़त्म हो गई और माल सामानों की आवाजाही तेज़ हो गई, जिससे न सिर्फ़ समय बच रहा है बल्कि लॉजिस्टिक क्षेत्र में भी इसका काफ़ी लाभ मिल रहा है। जीएसटी शायद दुनिया का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म होगा।

भारत में इतना बड़ा टैक्स रिफॉर्म सफ़ल इसलिए हो पाया क्योंकि देश के लोगों ने इसे अपनाया और जन-शक्ति के द्वारा ही जीएसटी की सफ़लता सुनिश्चित हो सकी। आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि इतना बड़ा रिफॉर्म, इतना बड़ा देश, इतनी बड़ी जनसंख्या इसको पूर्ण रूप से स्थिर होने में 5 से 7 साल का समय लगता है लेकिन देश के ईमानदार लोगों का उत्साह, देश की ईमानदारी का उत्सव जन-शक्ति की भागीदारी का नतीज़ा है कि एक साल के भीतर-भीतर बहुतेक मात्रा में यह नई कर प्रणाली अपनी जगह बना चुकी है, स्थिरता प्राप्त कर चुकी है और आवश्यकता के अनुसार अपनी इनबिल्ट व्यवस्था के द्वारा वो सुधार भी करती रहती है। ये अपने आप में एक बहुत बड़ी सफ़लता सवा-सौ करोड़ देशवासियों ने अर्जित की है।

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