मप्र में अधिकारियों के संबंध भारत-पाक जैसे : मुख्यमंत्री

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक बयान आज प्रदेश की अफसरशाही में चर्चा का विषय बना हुआ है। “सिविल सर्विस डे” के मौके पर भोपाल के प्रशासनिक अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अफसरों की तारीफ करते हुए अचानक ऐसा कह गये कि उनका बयान चर्चा में आ गया। उन्होंने कहा कि – कभी-कभी मप्र में अधिकारियों के संबंध हिंदुस्तान पाकिस्तान की लड़ाई जैसे लगते हैं।

हालांकि मुख्यमंत्री की इस बात का मुख्य सचिव बी पी सिंह ने न केवल खंडन किया बल्कि बताया कि – यदि ऐसे संबंध होते तो वे (मुख्य सचिव) और डीजीपी एक ही गाड़ी में बैठ कर इस आयोजन में नहीं आते। मुख्यमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस ने कटाक्ष करते हुए कहा कि – सीएम का बयान उनकी हताशा बताता है कि 13 साल सीएम रहकर भी वे कुछ कर नहीं पाए हैं। कार्यक्रम में डीजीपी सहित तीनों भारतीय सेवाओं के अधिकारी उपस्थित थे।

आयोजन में पहले तो मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश की तीनों सेवाओं प्रशासनिक, पुलिस और वन के अधिकारियों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत में अंग्रेजों के राज से पहले से सिविल सर्विस का स्वरूप रहा है। वे एक्सपर्ट होते थे।सरकार की नीतियों को जमीन पर उतारना सिविल सर्विस का काम है। प्रदेश में सिविल सर्विस से मैं खुश हूं, क्योंकि अधिकारी बेहतरीन काम कर रहे हैं। तीनों सेवाओ ने प्रदेश में शानदार काम किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने हमेशा महिला सशक्तिकरण के बारे में काम करने का सोचा। इसीलिए मैंने बच्चियों के जन्म से लेकर शादी तक कि योजनाएं बनाईं। हो सकता है सीएम हेल्प लाइन से लोग संतुष्ट न हों लेकिन ज्यादातर लोग इससे संतुष्ट हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कुछ जगह हम कमजोर रहे हैं। हालांकि कुछ योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर नाम मिला है।

अपने भाषण में अचानक मुख्यमंत्री के तेवर बदले। उन्होंने अधिकारियो को नसीहत देना शुरू कर दिया। बोले – टैलेंट के चलते यह नौकरी मिली है। इसलिए तय समय सीमा की बजाए लक्ष्य के लिए तड़प के साथ काम करें।जुनून के साथ काम करें। उन्होंने कहा कि मैं खुद तड़प के साथ काम करता हूं, ताकि गरीबों का विकास हो।कभी कभी तो एक दिन में कई कार्यक्रमों में 20 हजार से अधिक लोगों से हाथ मिलाता हूं।

उन्होंने अधिकारियों को नसीहत दी कि वे नकारात्म न रहें, हमेशा सकारात्मक रहें। चने की खरीदी पर अधिकारियों पर बातों ही बातों में तंज कसा कि छन्ना ऐसा न लगायें कि छानने में मिट्टी के साथ चना ही न निकल जाए। जनप्रतिनिधियों और मीडिया से तालमेल की भी सलाह दी।

मुख्यमंत्री ने अफसरों को गुटबाजी से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि अधिकारियों के भी गुट बनते हैं। कभी कभी इनके बीच भारत पाकिस्तान की लड़ाई लगने लगती है। ऐसा नहीं होना चाहिए आपस में बेहतर तालमेल रखें, हीनभावना से दूर रहें, अहंकार से दूर रहें, धैर्य रखें, और जनता की समस्याओं के समाधान निकालें। उत्साह से भरे रहें, काम फुर्ती से करें।

मुख्यमंत्री के उद्बोधन के बाद मुख्य सचिव बीपी सिंह ने सीएम की कुछ बातों पर असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि – प्रदेश में अधिकारियों में बेहतर तालमेल है। यदि भारत पाकिस्तान जैसे संबंध होते तो मैं स्वयं डीजीपी के साथ कार में बैठकर यहां नहीं आता।

कांग्रेस की चुटकी

मुख्यमंत्री के बयान पर प्रदेश की अफसरशाही हैरान हैं, वहीं कांग्रेस के मीडिया प्रभारी केके मिश्रा ने चुटकी लेते हुए कहा कि यह एक असफलता मुख्यमंत्री की हताशा है। 13 साल सीएम रहकर भी प्रदेश के हित में कोई काम नहीं कर सके। मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी अक्षमता का ठीकरा अधिकारियों पर फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

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