महिला अपराध के मामले में पहले और अपहरण के मामले में चौथे पायदान पर है मध्य प्रदेश

भोपाल: एनसीआरबी-2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में कई सालों से मध्य प्रदेश पहले पायदान पर है। वहीं 2016 में अपहरण के मामले में भी मध्य प्रदेश 7237 (8.1 फीसदी) अपहरणों के साथ चौथे स्थान पर है। इनमें 69.00 फीसदी यानी 4994 लड़कियों का अपहरण हुआ है। वहीं इस मामले में मध्यप्रदेश 2014 में 7833 अपहरणों के साथ दूसरे एवं 2015 में 6778 अपहरणों के साथ पांचवें स्थान पर रह चुका है। देश में घटते लिंगानुपात का साइड इफेक्ट बेटियों के अपहरण के रूप में सामने आ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस साल देश में कुल 66, 225 लड़कियों का अपहरण किया गया इनमें से आधी से ज्यादा यानी 33, 855 लड़कियों का अपहरण सिर्फ शादी के लिए किया गया। दरअसल घटते लिंगानुपात के चलते देश के कई इलाकों में लड़कों की शादी के लिए लड़कियां नहीं मिल रही हैं, ऐसे में शादी के लिए लड़कियों को अगवा करने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक नवजात से लेकर 6 साल की उम्र तक की 139 बच्चियों का एवं 6 साल से 12 वर्ष की 666 बच्चियों का अपहरण शादी के लिए किया गया।

उल्लेखनीय है कि 2014 से एनसीआरबी ने अपहरण के कारणों को सूचीबद्ध करना शुरू किया था। जिसके चलते ही शादी के लिए हो रहे अपहरण के आंकड़े सामने आए हैं। 2016 में शादी के लिए 59 लड़कों का भी अपहरण किया गया। नाबालिग सहित 18 से 30 साल की उम्र तक के 57 लड़के एवं 30 से 60 साल के बीच के एक पुस्र्ष का अपहरण शादी के लिए किया गया। इस साल कुल 23,350 पुस्र्षों का अपहरण किया गया। अगर महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े देखें तो 2016 में देशभर में 3,38,954 अपराध दर्ज किए गए जिनमें पीड़ित महिलाएं थी।

दर्ज अपराधों में 66,525 मामले यानी 19.62 फीसदी केवल अपहरण के हैं। वहीं कुल अपहरण 89,875 में से महिलाओं को अगवा करने का ये आंकड़ा 74 फीसदी है। अगर अपहरण के कारण की बात करें तो 37.7 फीसदी शादी के अलावा, अवैध संबंध के लिए 2.1, हत्या के लिए 1.3, गैर कानूनी गतिविधियों के लिए 1.2, गोद लेने 0.8, फिरौती 0.8, बदला 0.6, वेश्यावृति 0.1, भिखारी बनाने 0.1, अन्य कारण 55.4 फीसदी अपहरण किए गए।

इस मामले में समाजशास्त्री प्रो, महेश शुक्ला का कहना है कि लिंगानुपात में सुधार नहीं हुआ तो इस प्रकार की घटनाएं और तेजी से बढ़ेंगी। इस प्रकार की घटनाएं उत्तर भारत के राज्यों में ज्यादा और दक्षिण में कम होते हैं। यह सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश पर भी निर्भर करता है। भले इस मामले में यूपी टॉप पर है, लेकिन जनसंख्या औसत के मामले में हरियाणा की स्थिति बहुत खराब है।

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