महिला दिवस पर प्रदर्शित होगी लेख टंडन की फिल्म ’फिर उसी मोड़ पर’

लखनऊ: इस वर्ष के महिला दिवस (मार्च 8, 2019) में एक विशेष आयोजन चार चांद लगाने वाला है- सुविख्यात महान निर्देशक स्वर्गीय लेख टंडन की चिरप्रतीक्षित फिल्म ’फिर उसी मोड़ पर’…….तलाक’ संपूर्ण भारत में चलचित्रपटों पर प्रदर्शित हो रही है।

सम्प्रति देश के समक्ष सबसे ज्वलंत सामाजिक महत्व का विषय मुस्लिम समाज में प्रचलित ’’तीन तलाक’’ की प्रथा का निराकरण है। यह एक निंदनीय कुरीति है जिसके अंतर्गत कोई भी पति अपनी लाचार और बेबस पत्नी को ’’तलाक तलाक तलाक’’ कह कर प्रताडित करते हुए अपने जीवन से निष्कासित कर सकता है। इस विषय के इतने ज्वलंत रुप धारण करने से पहले ही सुविख्यात महान निर्देशक – लेखक लेख टंडन (’’प्रोफेसर’’, ’’आम्र्रपाली’’, झुक गया आसमान’’, ’’जहां प्यार मिले’’, ’’प्रिंस’’, ’’आन्दोलन’’, ’’दुल्हन वही जो पिया मन भाये’’, ’’एक बार कहो’’, ’’शारदा’’, ’’अगर तुम न होते’’, ’’खुदा कसम’’, ’’दूसरी दुल्हन’’, ’’मिल गयी मंजिल मुझे’’ इत्यादि फिल्मों से प्रशंसित) ने इस अत्यधिक महत्वपूर्ण विषय की गंभीरता को भांपा और त्वरित गति से उस पर एक निराली फिल्म बनाने की योजना को कार्यान्वित किया। फलस्वरुप एक अनोखी फिल्म ’’फिर उसी मोड़ पर’’ का निर्माण कार्य केवल 6 महीनों के अंतराल में लेख टंडन के पटु, समक्ष और बेजोड़ निर्देशन में संपन्न हुआ।

फिल्म निर्माण की समाप्ति के उपरांत दुर्दैव से इस महान निर्देशक-लेखक का स्वर्गारोहण हो गया। परन्तु देहावसान के पूर्व लेखजी ’’फिर उसी मोड़ पर’’ जैसी महत्वपूर्ण फिल्म को पूर्णतया संपादित कर पाये। अब यह फिल्म उनके सहयोगी निर्माता त्रिनेत्र/कनिका/अंशुला बाजपेई अपनी निर्माण संस्था कनिका मल्टीस्कोप प्राइवेट लिमिटेड के अंतर्गत हजारों प्रशंसकों के समकक्ष मार्च 8, 2019 को प्रस्तुत करनेवाले हैं। भारतवर्ष में प्रदर्शन के उपरांत फिल्म मध्य एशिया, यूरोप और अमेरिका में भी प्रदर्शित होगी। इससे पहले लेखजी ने बिना गवायें अपने चिरपरिचित और विश्वासपात्र अभिनेताओं/अभिनेत्रियों का चयन किया और महत्वपूर्ण किरदार कंवलजीत सिंह, परमीत सेठी, एस.एम. जहीर, गोविन्द नामदेव, स्मिता जयकर, कनिका बाजपेई, राजीव शर्मा, भारत कपूर, अरुण बाली, हैदर अली, विनीता मलिक, संजय बत्रा, दिव्या द्विवेदी और नवोदिता नायिका जिविधा आष्टा, शिखा इतकान ने जीवंत किए।

फिल्म की कहानी एक सीधी साधी और मजलूम मुस्लिम महिला ’’नाज’’ पर केंदित है जिसे उसका बचपन का साथी ’’शाहिद’’ धोखे से निकाह करने के बाद तलाक दे देता है। चार महीने की गर्भवती नाज को एक नेक इंसान ’’रशीद’’ सहारा देता है और उसके बच्चे को अपना नाम देकर निकाह कर लेता है। इसके बाद रशीद का कैंसर से इंतकाल हो जाता है और हजारों कठिनाइयों के बावजूद नाज अपने बेटे (रशीद जूनियर) को पालती, पढ़ाती और लिखाती है। रशीद जूनियर एक उच्च स्नातकीय उपाधि प्राप्त करता है और अपनी बचपन की दोस्त शबनम से निकाह कर लेता है। रशीद जूनियर को दुबई मेें अच्छी नौकरी मिलती है जहां वे अपनी विदेशी सेक्रेटरी के प्रेम जाल में फंस जाता है और शबनम को तलाक दे देता है। नाज अब ’’फिर उसी मोड़ पर’’ है और अपने बेटे की नाइंसाफी और तीन तलाक की कुरीति से जंग छेड़ देती है। आगे पर्दे पर देखिये।

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