महिला प्रोफेसर ने प्रेमी संग मिलकर रची थी डीन की हत्या की साजिश

मेरठ: 11 मार्च को सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के डीन राजवीर सिंह पर हमला हुआ था। डीन पर हुए हमले के मामले में मेरठ पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस ने बताया कि कॉलेज की महिला प्रोफेसर ने डीन बनने के लालच में अपने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। इसके लिए उधम सिंह गैंग के दो शूटरो को पांच लाख की सुपारी दी थी। फिलहाल पुलिस ने महिला प्रोफेसर के प्रेमी, सुपारी दिलाने वाले आरोपी और उधम सिंह गैंग के शूटर को गिरफ्तार किया है।

मेरठ एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कॉलेज के डीन राजवीर सिंह के साथ काम करने वाली महिला प्रोफेसर डा. आरती भटेले खुद डीन बनना चाहती थी। उन्होंने राज्यपाल से कई बार डा. राजवीर की योग्यता को लेकर शिकायत भी की थी। लेकिन कोई फायदा ना होता देख आरती ने अपने प्रेमी बिल्डर अनिल बालियान के साथ मिल कर राजवीर की हत्या की साजिश रच डाली। इसमें अनिल ने पड़ोसी मुनेंद्र बाना की मदद ली। मुनेंद्र ने अपने साले और उधम सिंह गैंग के शूटर आशु को हत्या की सुपारी दिलाई। आशु ने नदीम निवासी हापुड़ के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया।

एसएसपी ने बताया कि डीन राजवीर सिंह पर हमला करने के आरोप में अनिल बालियान, मुनेंद्र बाना और आशु चड्ढा उर्फ मोंटी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, डा. आरती और नदीम अभी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रहा है। बताया कि आशु नौ फरवरी को डासना जेल से छूट कर आया था और 11 मार्च को उसने सुपारी लेकर हमले की वारदात को अंजाम दिया। आपको बता दें कि पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में बदमाशों के चेहरे या बाइक आदि का नंबर स्पष्ट नहीं हो पा रहा था। पुलिस की जांच रंजिश, किसी छात्र से विवाद और वेटरनरी कॉलेज में नियुक्तियों पर ही आकर टिक जाती थी। लेकिन अब तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले का असली सच सामने आ गया है।

शातिराना अंदाज में रची गई थी डीन की हत्या की साजिश डीन की हत्या की साजिश को बड़े ही शातिराना अंदाज में रचा गया था। रेकी करने से लेकर खुद को बचाने की पहले से ही प्लानिंग की गई थी। यही कारण था कि वारदात के समय आरोपी महिला प्रोफेसर और उसका प्रेमी अनिल बालियान शॉपरिक्स मॉल में शॉपिंग करने पहुंच गए और खुद की उपस्थिति दूसरी जगह दिखाई। एसएसपी ने बताया कि करीब 3 माह से प्लानिंग की जा रही थी। पूरी प्लानिंग इस तरह से की गई कि पुलिस वारदात के बाद कड़ियां न जोड़ पाए।

मोबाइल स्नेचर का पीछा करते हुए बाइक से गिरे पुलिसकर्मी, घायल होने के बाद भी दौड़कर पकड़ा पुलिस को गुमराह करने किया था ये काम ऐसे में सभी आरोपियों ने आपस में फोन पर बातचीत कम कर दी थी और केवल व्हाट्सएप कॉल की जा रही थी। वारदात से कुछ ही समय पहले ही अनिल ने व्हाट्सएप कॉल करके डा. आरती को अपने पास कॉलोनी में बुलाया और यहीं से दोनों शॉपिंग के लिए शॉपरिक्स मॉल पहुंच गए। यहां लगातार दोनों कैमरे के सामने मौजूद रहे, ताकि कोई परेशानी होने पर पुलिस को कैमरे की फुटेज दिखाकर गुमराह किया जा सके।

 

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