माननीयों के बल्ले बल्ले, बढ़े भत्ते पर लगी कैबिनेट की मुहर

अखिलेश अखिल

जब आपस में मिलकर ही अपना वेतन भत्ता तय कर लेना है तब डर कैसा ? कौन सवाल करेगा ? जनता कौन हैं और जनता की औकात ही क्या ? सांसद लोग हमेशा ऐसा ही करते सोचते हैं और इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। खबर है कि संसद सदस्यों को अब बढ़े हुए भत्ते मिलना लगभग तय हो गया है, क्योंकि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इस संबंध में एक प्रस्ताव को अनुमति दे दी। सरकार के सूत्रों ने बताया कि सांसदों के निर्वाचन क्षेत्र भत्ते, फर्नीचर भत्ते एवं संपर्क खर्चो में खासा इजाफा होगा।

संसदीय मामलों के मंत्रालय ने निर्वाचन क्षेत्र भत्ते को 45 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये करने का प्रस्ताव किया था। मंत्रालय ने एकमुश्त फर्नीचर भत्ते को वर्तमान के 75 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में घोषणा की थी कि सांसदों के वेतन की प्रत्येक पांच वर्ष के बाद समीक्षा के लिए एक स्थायी प्रणाली बनायी जायेगी।

सांसदों को 50 हजार रुपये का मूल वेतन और 54 हजार रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता तथा अन्य भत्ते मिलते हैं। केंद्र एक सांसद पर प्रति माह करीब 2.7 लाख रुपये व्यय करता है। लोकसभा में अध्यक्ष को छोड़कर 536 सांसद हैं जिनमें दो एंग्लो इंडियन समुदाय के मनोनीत सदस्य शामिल हैं। आठ सीटें रिक्त हैं। राज्यसभा में 239 सदस्य हैं।

याद रहे अब इसी तर्ज पर विधान सभाओं के लिए भी प्रस्ताव आएंगे और फिर उस पर मुहर लगेगी। ऐसा ही चलता रहा है और चलता भी रहेगा।

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