माफिया अभियान : कमलनाथ की राह पर कांग्रेस से निपटेंगे शिवराज

तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विभिन्न प्रकार के संगठित माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ अभियान छेड़कर इसे इनके विरुद्ध युद्ध करार दिया था। किसानों की ऋण माफी के साथ ही कांग्रेस सरकार इसे अपनी सबसे बड़ी यूएसपी मान रही थी। कांग्रेस विधायकों के दल बदलने और सरकार गिरने के बाद कमलनाथ का आरोप था उनकी सरकार ने जिन-जिन के खिलाफ कड़े कदम उठाए उनसे भाजपा ने सांठगांठ कर उनकी सरकार को गिराया है। वहीं यह भी कहते थे कि क्या ऐसा अभियान चलाना उनकी गलती थी। जिन 26 विधानसभा क्षेत्रों में अभी उपचुनाव होना है उनमें कांग्रेस इस अभियान को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में बखान करने वाली है और कमलनाथ ऐसा करते भी रहे हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने चौहान 20 जुलाई को जिलों की कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए पुलिस को सफेदपोश बदमाशों, ड्रग्स तस्करों, हुक्का लाउंज और चिटफंड कंपनी आदि पर कानून का शिकंजा कसने के लिए दो- टूक शब्दों में निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने भू-माफिया, सहकारिता माफिया, राशन की कालाबाजारी करने वालों और मिलावटखोरों आदि के विरुद्ध तत्परता से कार्यवाही करने को भी कहा है।भाजपा की 15 साल की सत्ता के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेशव्यापी माफियाओं के खिलाफ सघन मुहिम चलाई जिसके अंतर्गत भू- माफिया, शराब माफिया, खनन माफिया, रेत माफिया और मिलावटखोरों पर जबरदस्त हमले किए गए। सरकार का दावा था कि माफियाओं के कब्जे से बंधक बनाई गई महिलाओं को छुड़ाया गया, सरकारी संरक्षण में बनाए गए अतिक्रमण तोड़े गए और कई लोगों को भू-माफियाओं से भूखंड भी मिल सके। शुद्ध के लिए युद्ध चलाया गया पहली बार प्रदेश में दूध में मिलावट करने वालों के खिलाफ रासुका लगाई गई उन्हें गिरफ्तार किया गया और सुनिश्‍चित किया गया कि मध्य प्रदेश जहरीले दूध से मुक्त प्रदेश हो सके। शिवराज ने भी अपराधियों के खिलाफ तीखे तेवर दिखाए हैं और साफ-साफ कह दिया है कि हमें प्रदेश में गुड- गवर्नेंस सुनिश्‍चित करना है। इस प्रकार क्या उपचुनावों की चुनौती में कांग्रेस का मुकाबला और घेराबंदी शिवराज कमलनाथ की राह पर चलकर करने वाले हैं? चूंकि कमलनाथ अभियान चलाकर उस समय अनेक लोगों की वाहवाही लूट चुके हैं इसलिए उससे भी प्रभावी ढंग से मैदानी स्तर पर यदि उनकी सरकार कार्रवाई कर पाती है तो फिर कमलनाथ की यूएसपी का फायदा भाजपा को मिल सकता है। बशर्ते की शिवराज उससे बड़ी लकीर खींच सकें।

शिवराज को प्रदेश की नौकरशाही और उसके तौर- तरीकों का अधिक बारीकी से ज्ञान है और वे उसे अच्छे से समझते हैं कि कहां किस स्तर पर अभियान में कमी रह जाती है या वह जिस उद्देश्य के लिए चालू किया गया है उस लक्ष्य की प्राप्ति के पूर्व ही प्रशासनिकअधिकारियों और कर्मचारियों से सांठगांठ कर मैदानी स्तर तक प्रभावित लोगों को इसका फायदा मिले उसके पहले ही उद्देश्य भटक कर निष्प्रभावी हो जाता है। इस बात की सतत निगरानी की जरूरत होती है कि जो अभियान छेड़ा गया है वह निचले स्तर तक सफलतापूर्वक अमलीजामा पहने। शिवराज ने इसीलिए यह भी साफ कर दिया कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही हुई तो कलेक्टर और एसपी जिम्मेदार माने जाएंगे। सिस्टम की बारीकियों और खामियों से शिवराज अच्छी तरह से वाकिफ हैं, इसलिए उन्होंने कहा कि सिस्टम में कई बार नीचे के लोग मिलकर खाते पीते रहते हैं। (इस संबंध में राज्य विधानसभा में 80 के दशक में समाजवादी नेता विधायक नर्बदा प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा था कि इस प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति कुछ ऐसी हो गई है कि इस हाथ ला और उस हाथ ऑर्डर ले जा)।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अब यह किसी भी हालत में नहीं चलेगा। आप लोग अपराधियों की सूची बनाइए और कार्रवाई कीजिए। सभी प्रकार के माफियाओं का खात्मा करना है। जनता की संपत्ति हड़पने वालों पर कार्रवाई की जाए। गरीबों को संरक्षण और अपराधियों पर लगाम लगाना सरकार की प्राथमिकता है।

कांग्रेस नेताओं खासकर कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री सांसद दिग्विजय सिंह शिवराज सरकार पर दलितों आदिवासियों और समाज के कमजोर वर्गों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उसकी तगड़ी घेराबंदी करने का कोई अवसर हाथ से नहीं जाने दे रहे हैं। शिवराज ने भी इस ढंग से अपनी सक्रियता दिखा दी है ताकि वह इन आरोपों का समाधान कारक उत्तर दे सकें। उन्होंने अपनी मंशा रेखांकित करते हुए कहा कि बेटियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने बालों को सजा दिलानी है। देह व्यापार और छेड़छाड़ करने वाले अपराधियों पर सख्त कार्रवाई कीजिए। बड़े अपराधियों को जिला बदर करें और उनके अवैध निर्माण तोड़े जाएं। जहां तक रेत माफिया और खनन माफिया पर प्रभावी कार्यवाही करने का सवाल है यह बात कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव के पूर्व जोर- शोर से कही थी। कांग्रेस सरकार बनने के बाद रेत के अवैध उत्खनन और कारोबार पर कोई विशेष अंकुश लगता नजर नहीं आया था। इतना जरूर हुआ कि कई स्थानों पर धंधा चलता रहा उसमें केवल कुछ चेहरे बदलते गए। शिवराज सरकार के सामने भी यह एक बड़ी चुनौती है कि वह इस पर रोक लगाये। फिलहाल तो रेत और खदान माफियाओं के हौसले इतने बुलंद है कि वह सरकारी अमले पर ही हमला कर देते हैं। देखने वाली बात यही होगी कि खनन माफिया पर सरकार कितनी प्रभावी और कड़ी कार्रवाई कर पाती है।

और अंत में………..!

सांसद दिग्विजय सिंह ट्विटर के माध्यम से बड़े तीखे और व्यंगात्मक अंदाज में अपनी बात कह कर राजनीति को गर्मा देते हैं। अपने ट्वीट में दिग्विजय सिंह ने लिखा है कि संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी का भोपाल शहर में स्वागत है। कृपया भाजपा के मुख्यमंत्री और मंत्री गणों के आचरण व भ्रष्टाचार के विषय में अपने स्वयंसेवकों से गुप्त रिपोर्ट अवश्य लें। शिवराज जी के परिवारजनों के अवैध रेत खनन में सम्मिलित होने की जानकारी भी अवश्य लें। उल्लेखनीय है कि शिवराज सिंह ने एक दिन पहले ही अधिकारियों को माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं और उसके दूसरे दिन ही उन पर दिग्विजय ने तंज किया है।

अरुण पटेल/सुबह सबेरे से साभार

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