माफिया बृजेश पर कोर्ट हुआ सख्त, कहा- आ नहीं सकते तो व्हील चेयर पर लेकर आओ

वाराणसी: माफिया डॉन बृजेश सिंह उर्फ अरुण कुमार सिंह को उस वक्त तगड़ा झटका लगा जब एडीजे तृतीय आरके पांडे ने आदेश दिया कि यदि ब्रिजेश चल नहीं प् रहे है तो उसे व्हील चेयर पर ले आकर कोर्ट में पेश करो। आपको बता दें कि बृजेश सिंह इस समय पुलिस अभिरक्षा में बीएचयू के ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं।

विदित हो कि यूपी के चर्चित सिकरारा नरसंहार कांड में आरोपी बृजेश के 23 दिसंबर से ट्रॉमा सेंटर में भर्ती होने से मुकदमे की सुनवाई टल रही है। नरसंहार केस में पीड़ित हीरावती के विधिक पैरोकार राकेश न्यायिक ने इसपर आपत्ति जताई है। आरोप है कि बगैर गंभीर बीमारी के ही बृजेश ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हैं और जान-बूझकर नई-नई तरकीबों से ट्रायल में गतिरोध पैदा कर रहे हैं। ऐसे में राकेश न्यायिक ने अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार के माध्यम से ट्रॉमा सेंटर के असोसिएट प्रफेसर डॉ. सौरभ सिंह को नोटिस भेज 11 बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

कौन है बृजेश सिंह

बृजेश सिंह उर्फ अरुण कुमार सिंह का जन्म वाराणसी में हुआ था। उनके पिता रविन्द्र सिंह इलाके के रसूखदार लोगों में गिने जाते थे। सियासीतौर पर भी उनका रुतबा कम नहीं था। बृजेश सिंह बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में काफी होनहार थे। 1984 में इंटर की परीक्षा में उन्होंने बहुत अच्छे अंक पाकर टॉप किया। उसके बाद बृजेश ने यूपी कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई की। वहां भी उनका नाम होनहार छात्रों की श्रेणी में आता था।

पिता की हत्या ने बृजेश को माफिया डॉन बना दिया। बृजेश सिंह का उनके पिता रविंद्र सिंह से काफी लगाव था। वह चाहते थे कि बृजेश पढ़ लिखकर अच्छा इंसान बने। समाज में उसका नाम हो। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 27 अगस्त 1984 को वाराणसी के धरहरा गांव में बृजेश के पिता रविन्द्र सिंह की हत्या कर दी गई। इस काम को उनके सियासी विरोधी हरिहर सिंह और पांचू सिंह ने साथियों के साथ मिलकर अंजाम दिया था। राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में पिता की मौत ने बृजेश सिंह के मन में बदले की भावना को जन्म दिया। इसी भावना के चलते बृजेश ने जाने अनजाने में अपराध की दुनिया में अपना कदम बढ़ा दिया।

बृजेश सिंह ने बदले के लिए एक साल का इंतजार किया और आखिर वह दिन आ ही गया जिसका बृजेश को इंतजार था। 27 मई 1985 को रविंद्र सिंह का हत्यारा बृजेश के सामने आ गया और उसे देखते ही बृजेश का खून खौल उठा और उसने दिन दहाड़े अपने पिता के हत्यारे हरिहर सिंह को मौत के घाट उतार दिया। यह पहला मौका था जब बृजेश के खिलाफ पुलिस थाने में मामला दर्ज हुआ। हरिहर को मौत के घाट उतारने के बाद भी बृजेश सिंह का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उसे उन लोगों की भी तलाश थी जो उसके पिता की हत्या में हरिहर के साथ शामिल थे। 9 अप्रैल 1986 का दिन जब अचानक बनारस का सिकरौरा गांव गोलियों की आवाज़ से गूंज उठा।

दरअसल, यहां बृजेश सिंह ने अपने पिता की हत्या में शामिल रहे पांच लोगों को एक साथ गोलियों से भून डाला था। इस वारदात को अंजान देने के बाद पहली बार बृजेश गिरफ्तार हुए और इस घटना के बाद बृजेश देश के सबसे बड़े डॉन की फेहरिस्त में शामिल हो गया और उसकी दोस्ती दाऊद से हुई लेकिन ये दोस्ती ज्यादा दिन चल नहीं पाई और ये दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए।

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