मुंशी प्रेमचंद का साहित्य तत्कालीन समय का इतिहास : लेखक संघ

लखनऊ ब्यूरो। सर्वहारा लेखक संघ के तत्वावधान में कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद के 139वीं जयन्ती के अवसर पर अमीनाबाद इंटर कॉलेज के सभागार में सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार व लेखक डॉ. एसके पंजम ने किया।

सेमिनार में बोलते हुए सलेस के सचिव व युवा लेखक वीरेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि हिन्दी साहित्य की चर्चा प्रेमचंद के साहित्य के बगैर अधूरा है। प्रेमचंद ने विदेशी गुलामी की बेडय़िों में जकड़ी आम जनता के दुख-दर्द व उनकी परेशानियों को अपनी रचनाओं में वे यथार्थ रूप में लाते है और प्रेमचंद का साहित्य तत्कालीन समय का इतिहास है।

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए शिक्षाविद वालेन्द्र कटियार ने कहा कि प्रेमचन्द की रचनाओं में ऐतिहासिक विकास मिलता है। प्रारम्भिक दौर की रचनाओं में जहां वे सामंती -पारंपरिक मूल्यों की पड़ताल करते हैं तो वही दूसरे दौर की रचनाओं में उन पर गांधी जी का प्रभाव नजर आता है।

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. एस के पंजम ने कहा कि प्रेमचन्द ने दबे कुचले लोगों की पीड़ा, सामाजिक विषमता, जात-पांत, छुआछूत, पुरोहितों के आतंक के खिलाफ बड़ी बेबाकी से कलम चलाया है। प्रेमचंद का पंचपरमेशर से कफन तक का सफर लेव तोल्स्तोय से मैक्सिम गोर्की की तरफ की यात्रा है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें... ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper