मुकुंदरा की इकलौती बाघिन बाड़े में कैद, भरत सिंह ने दी धरने की चेतावनी

कोटा: राजस्थान में कोटा, झालावाड़ जिलों और चित्तौडगढ जिले के रावतभाटा क्षेत्र में फ़ैले मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व की इकलौती बची बाघिन का जोड़ा बनाने के साथ-साथ यहां और बाघ- बाघिन लाकर आबाद करने की मांग जोर पकड़ रही है। पर्यावरण एवं वन्य जीवो में गहरी रूचि रखने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री और कोटा जिले की सांगोद सीट से कांग्रेस के विधायक भरत सिंह कुंदनपुर ने तो इकलौती बाघिन को खुले जंगल में नहीं छोड़ने की स्थिति में संभागीय आयुक्त कार्यालय पर धरना देने की चेतावनी दे डाली है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दृष्टिगत यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि उक्त बाघिन मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में लगभग बंद ‘बाड़े’ में पिछले 16 माह से कैद रहकर नितांत एकाकी जीवन जी रही है और नीतिगत फैसला करने वाले प्राधिकरण के अधिकारी राष्ट्रीय राजधानी में बैठकर पिछले 18 महीनों में इस टाइगर रिजर्व में नए बाघों को लाकर आबाद कर पाने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण सहित राज्य के वन्यजीव विभाग के आला अधिकारियों की वन्यजीव विरोधी इसी जड़ता और हठ को तोड़ने के लिए विधायक भरत सिंह ने एक सप्ताह में इस बाघिन को खुले जंगल के स्वच्छंद वातावरण में नहीं छोड़े जाने की स्थिति में कोटा में संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना देने की चेतावनी दी है।

सिंह का आरोप है कि इस बार बाघिन को कैद में रखकर एनटीसीए के अफसर इस टाइगर रिजर्व के विकास में जानबूझकर बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। श्री सिंह ने धरने के लिए संभागीय आयुक्त कार्यालय को इसलिए चुना है क्योंकि राज्य सरकार ने मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में पर्यटन एवं अन्य विकास के लिए जो समिति बनाई है, उसकी अध्यक्षता संभागीय आयुक्त को ही सौंपी है जिन्हें अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को भेजनी है।

सिंह ने कहा कि यह बड़ी हास्यास्पद स्थिति है कि कोटा का मुकुंदरा हिल्स राजस्थान में रणथम्भोर, सरिस्का के बाद प्रदेश का यह तीसरा टाइगर रिजर्व है लेकिन देश का ऐसा इकलौता ‘दुर्लभ टाइगर रिजर्व’ है जिसमें एक भी टाइगर नहीं है।

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