मुख्यमंत्री योगी ने किया गंगा हरीतिमा अभियान का शुभारम्भ

इलाहाबाद ब्यूरो। राष्ट्रीय धरोहर मां गंगा का अविरल प्रवाह बनाये रखने व प्रदूषण मुक्त करने हेतु गंगा किनारे स्थित 11 मण्डलों के 27 जनपदों के अंतर्गत प्रदेश में गंगा हरीतिमा अभियान गंगा के दोनों ओर तटीय क्षेत्रों में जन-जागरूकता, जन सहभागिता व सरकारी विभागों के माध्यम से सघन वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण तथा प्रदूषण की रोकथाम की जा रही है। इस अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु वन एवं वन्य जीव विभाग तथा 12 अन्य राजकीय विभागों के दायित्व निर्धारित किये गये हैं।

उक्त विचार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने परेड ग्राउण्ड में शनिवार को गंगा हरीतिमा अभियान एवं अन्य परियोजनाओं का शुभारम्भ के दौरान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है और इस अवसर पर राष्ट्रीय धरोहर मां गंगा का अविरल प्रवाह बनाये रखने व प्रदूषण मुक्त करने हेतु वन विभाग द्वारा गंगा हरीतिमा अभियान एवं परियोजनाओं का शुभारम्भ करते हुए खुशी हो रही हैं। एक वर्ष में वन विभाग ने पूरे प्रदेश में एक नयी पहचान बनायी है। मां गंगा की स्वच्छता एवं निर्मलता के लिए यह अभियान है। हिमालय से निकलने वाली पवित्र नदी गंगा एवं गंगोत्री से गंगासागर तक ढाई हजार किमी. की दूरी तय करती है। जिस प्रयागराज को विश्व की धरोहर के रूप में मान्यता दी गयी है और इस अभियान से सभी जुड़ते हैं तो आने वाले समय में आज जो प्रश्न खड़े हो रहे हैं वह नहीं होंगे।

उन्होंने 700 करोड़ तक की परियोजना का शुभारम्भ किया और कहा कि इन कार्यों को 2018 तक पूरा करना है। आगामी कुम्भ को भव्य एवं दिव्य बनाने के लिए उ.प्र के विभिन्न शहरों को प्रयागराज से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस अभियान के साथ जुडक़र कई कार्य किये हैं। कुम्भ में 193 देशों का प्रतिनिधित्व हो, इसके लिए तैयारी चल रही है।

उन्होंने अखाड़ों व संतों को कहा कि देश दुनिया से आने वाले श्रद्वालुओं को अपने यहां रूकने की व्यवस्था करें तो यह एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत होगा। उन्होंने कहा कि प्रयागराज की बात आती है तो भगवान श्री राम एवं निषादराज की भी चर्चा होती है। जिसके पर्यटन के लिए 33 करोड़ की लागत से कार्य प्रारम्भ है। कहा कि भले ही अलग अलग विभागों के विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ किया लेकिन सभी का उद्देश्य एक ही है। एक से सात जुलाई तक वन महोत्सव है और इसे जब प्रारम्भ करेंगे तो पूरे प्रदेश में व्यापक पैमाने पर खाली जमीनों पर पौधरोपण का कार्य होगा। कहा कि जल ही जीवन है और जीवन है तो हम सब का अस्तित्व है।

अन्त में मुख्यमंत्री ने गंगा के प्रति समर्पित एवं गंगा को स्वच्छ बनाने, वृक्षारोपण व पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन जागरूकता उत्पन्न करने वाले कुल 49 लोगों को अंगवस्त्रम् एवं स्मृति चिन्ह देकर पुरस्कृत किया गया। मुख्यमंत्री ने उ.प्र वन विभाग द्वारा प्रकाशित गंगा किनारे की प्राचीन वनस्पतियां एवं डा. महेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा लिखित राम वनगमन पथ की वनस्पतियां नामक पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर सांसद श्यामाचरण गुप्त, विनोद सोनकर, समस्त विधायकगण, महापौर अभिलाषा गुप्ता, कैबिनेट मंत्री नन्द गोपाल गुप्त, नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना, मण्डलायुक्त, जिलाधिकारी सहित अन्य अतिथिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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