मुर्गा-मुर्गी के तनाव में बेस्वाद हुए अंडे, आकार हो रहा छोटा

जबलपुर: जबलपुर वेटरनरी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मुर्गा-मुर्गी और अंडे पर शोध शुरू किया है। वैज्ञानिकों को मुर्गा-मुर्गी और अंडों में भारी परिवर्तन देखने को मिला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मुर्गा-मुर्गी में तनाव बढ़ने का मुख्य कारण पोल्ट्री फार्म में स्थान की कमी बढ़ता तापमान और अपर्याप्त भोजन के कारण पोल्ट्री फार्म के मुर्गा-मुर्गी और अंडों के ऊपर व्यापक असर पड़ा है।

विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशालय के डॉक्टर आदित्य मिश्रा और उनकी टीम ने मध्य प्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी संस्थान की मदद से यह शोध शुरू किया है। शोध में बताया गया है कि मुर्गी के जीन में मौजूद हिट साक प्रोटीन जो 70 होना चाहिए था, वह डेढ़ गुना बढ़ गया है। शोधकर्ताओं ने मुर्गी के अंडे देने की स्थिति मुर्गियों की कोशिकाओं में होने वाले परिवर्तन मुर्गी के लीवर किडनी हार्ट और व्यवहार पर अध्ययन कर रहे हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि सामान्य हालत में 35 सप्ताह में मुर्गे का वजन 2 किलो का हो जाता है, जो वर्तमान में 42 सप्ताह तक का समय ले रहा है। इसी तरह सामान्य स्थिति में मुर्गी 18 सप्ताह में अंडा देना शुरु कर देती है, अब 20 से 22 सप्ताह लग रहे हैं। अंडा पहले की तुलना में छोटा हुआ है।

मुर्गे का मांस अब फ्रीज में 10 दिन में ही खराब होने लगा है, जबकि कुछ समय पूर्व 3 सप्ताह तक फ्रीज में मांस सही हालत में रहता था। शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि मुर्गे के मांस का रंग बदल गया है और उसकी पौष्टिकता में कमी आई है। जबलपुर वेटरनरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की यह टीम 13 समूह बनाकर 35 दिनों तक सूक्ष्म अध्ययन करेगी। इसके लिए विभिन्न स्थितियों में मुर्गे-मुर्गियों को रखा जाएगा और उनका निरंतर अध्ययन किया जाएगा।

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