मेरठ में जिग्नेश, भीम आर्मी और बसपा की अनदेखी से हुआ बवाल

मेरठ: सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर हुए दलित बवाल के पीछे की कड़ियां खुलने लगी हैं। यह बवाल पूरी तरह से सुनियोजित षड़यन्त्र के रूप में सामने आया है। इसमें गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी, भीम आर्मी और बसपा के उग्र खेमे का संयुक्त प्लान था, जिसने दलित युवाओं को अपने खेमे में किया। पुलिस, प्रशासन और भाजपा ने इन सभी पहलुओं की पूरी तरह से अनदेखी की।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश लंबे समय तक बसपा का गढ़ रहा। यहां का सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बिजनौर समेत कई जिले बसपा का मजबूत गढ़ रहे। सहारनपुर की हरोड़ा सुरक्षित विधानसभा सीट से बसपा प्रमुख मायावती विधायक चुनी गई। राजनीति में आने से पहले मायावती की कर्मभूमि मुजफ्फरनगर जनपद रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर, नगीना सुरक्षित सीटों से दलित सांसद चुने जाते रहे, जबकि बसपा के विधायकों की तादाद भी अच्छी-खासी रही है। 2014 के लोकसभा चुनावों और 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में बसपा का यह गढ़ ढह गया और भाजपा एक बड़ी सियासी ताकत बनकर उभरी। अब इसी क्षेत्र को फिर से दलित प्रयोग की लैब बनाया गया है।

सहारनपुर में दलित स्वाभिमान के नाम पर चंद्रशेखर उर्फ रावण ने भीम आर्मी नाम का संगठन बनाकर दलित युवाओं को एकजुट करना शुरू हुआ। इसी का नतीजा सहारनपुर का शब्बीरपुर गांव का कांड रहा। फिलहाल चंद्रशेखर जेल में है, लेकिन भीम आर्मी लगातार अपना आधार मजबूत कर रही है। गुजरात चुनाव के बाद से ही एक आश्चर्यजनक तरीके से वहां के दलित समाज के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने भीम आर्मी के सहयोग से दलितों को सवर्णों के खिलाफ लामबंद करना शुरू किया। इस काम में बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा का भी उन्हें साथ मिल रहा है। हालांकि भीम आर्मी के बढ़ते कद से बसपा प्रमुख मायावती भी बौखलाई हुई हैं, लेकिन दलित वोट बैंक को भाजपा से दूर करने की मजबूरी में बसपा भी भीम आर्मी और जिग्नेश का समर्थन कर रही है।

कई महीने से जिग्नेश मेवाणी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में दलित स्वाभिमान के नाम पर जनसभा आयोजित कर रहा है, लेकिन पुलिस, प्रशासन और भाजपा नेताओं ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसी का नतीजा सोमवार को दलितों के बवाल के रूप में सामने आया। दबी जुबान से कई भाजपा नेताओं ने इसे स्वीकार भी किया। मेरठ के कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने इस बवाल को पूरी तरह से पुलिस-प्रशासन की असफलता करार दिया।

पूर्व विधायक व महापौर पति योगेश वर्मा की समर्थकों समेत हुई गिरफ्तारी से उनके समर्थक लामबंद होने लगे हैं। पुलिस प्रशासन ने पूर्व विधायक पर रासुका लगाने के संकेत दिए हैं। भाजपा दलितों के गुस्से को अभी भी शांत करने में नाकाम रही है। एक भी दलित भाजपा नेता ने अपने घर से निकलकर दलितों की आवाज सुनने की पहल नहीं की है।

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