मेरठ में बेटी के जन्मदिन पर मौत की नींद सोया पूरा परिवार, 14 घंटे तक तड़पती रही मासूम

मेरठ. मेरठ के टीपीनगर थाना क्षेत्र के शंभूनगर में शनिवार की देर रात फाइनेंस कंपनी के मालिक की कोठी में नौकर दंपती की चार साल की बेटी समेत दम घुटने से मौत हो गई। दंपती ने कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए तीसरी मंजिल पर अपने कमरे में कोयले जला रखे थे। रविवार शाम चार बजे तक भी दंपती के कमरे से बाहर नहीं आने पर कोठी के मालिक ने दरवाजा तोड़कर देखा, जहां दंपती बेड पर मृत मिले। बच्ची की सांसें चल रही थीं। उसे केएमसी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां बच्ची ने भी दम तोड़ दिया।

एक ओर जहां लोग नए साल का जश्न मना रहे थे, तो वहीं दंपती चार साल की मासूम के साथ ऐसे सोया कि पूरा परिवार नए साल का पहला दिन तक नहीं देख पाया। मासूम बच्ची 14 घंटे तक तड़पती रही। अगर कोई जाकर देख लेता कि दंपती दोपहर तक क्यों नहीं जागे तो शायद बच्ची की जान तो बच ही सकती थी। आगे तस्वीरों में जानें इस दर्दनाक हादसे की

शंभूनगर स्थित कोठी नंबर 171 में ऑटोमोबाइल्स कंपनी के मालिक आलोक बंसल पत्नी, मां और बेटे के साथ रहते हैं। उनके घर में नेपाल के जिला कैलाली के गांव चाऊमाला निवासी (38) चंदर पुत्र देव बहादुर पांच साल से पत्नी राधा और चार वर्षीय बेटी अंजलि के साथ रहते था। चंदर खाना बनाने का काम करता था और उसकी पत्नी साफ-सफाई का काम करती थी। नौकर दंपती कोठी की तीसरी मंजिल पर नौकर के लिए बने कमरे में रहते थे।

आलोक बंसल ने बताया कि वह परिवार के साथ शनिवार 8:45 बजे नववर्ष की पार्टी के लिए होटल चले गए थे। चंदर भी घर का सारा काम निपटाकर अपने कमरे में चला गया था। नए साल और बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए दंपती देर रात तक नहीं सोए थे। रात करीब दो बजे वह नीचे से कोयले का तसला लेकर ऊपर पहुंचे थे। इसके बाद वह नीचे नहीं आए।

मकान मालिक आलोक बंसल पत्नी के साथ नववर्ष की पार्टी मनाने के लिए होटल गए थे। उनकी मां और बेटी घर पर थे। बेटा दोस्तों के साथ घर के बाहर कोयले से हाथ ताप रहा था, जबकि कोठी के तृतीय तल पर नौकर दंपती और उनकी बेटी थे। मकान मालिक ने बताया कि वह रविवार सुबह 11 बजे सोकर उठे। स्नान करने के बाद मंदिर में पूजा करने चले गए। उन्होंने कोठी में भी पूजा का आयोजन किया था। 12 बजे पंडित कोठी पर पहुंच गए। इसके बाद परिवार के लोग पूजा में लग गए। नेपाली नौकर चंदर को उन्होंने फोन मिलाया, लेकिन नहीं उठा। उसी समय वह ऊपर जाते तो शायद दंपती और बच्ची की जान बच सकती थी।

कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए तसले में कोयला सुलगाकर चंदर पत्नी और बच्चे के साथ सो गया। आशंका है कि कोयले के कारण पूरी तरह बंद कमरे में ऑक्सीजन की कमी होने से तीनों का दम घुट गया। पुलिस-112 ने घटना की जानकारी ली। टीपीनगर पुलिस ने तीनों के शवों का पंचनामा भरकर मोर्चरी के लिए भेज दिया। रात में फोरेंसिक टीम ने कमरे से सैंपल लिए।

मकान मालिक ने बताया कि दंपती की बेटी अंजलि बहुत ही चंचल थी। पूरा दिन नीचे ही खेलती थी। पड़ोसी भी उससे प्यार करते थे। चंदर के दो बच्चे और भी हैं, जो नेपाल में रहते हैं।

कोठी की तीसरी मंजिल पर सर्वेंट रूम में दरवाजे के अलावा एक खिड़की है। सर्दी के कारण यह बंद थी। अन्य कोई वेंटीलेशन नहीं है। कमरे में कोयला सुलगने के कारण गैस बन गई थी। इससे हादसा हो गया।

आलोक ने बताया कि तीन दिन पहले ही चंदर को कमरे में कोयला सुलगाने से मना किया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि अब इस तरह का हादसा हो जाएगा।

रविवार दोपहर चार बजे सर्वेंट रूम को खोला गया। तीनों शवों के मोर्चरी ले जाने के बाद पुलिस ने कमरे को बंद कर दिया था। करीब सात बजे फोरेंसिक टीम शंभूनगर सैंपल लेने के लिए पहुंची। फोरेंसिक टीम ने जैसे ही दोबारा से कमरा खोला तो उसमें से बदबू आ रही थी। कमरे में देखा तो कोयले से भरा तसला बेड से कुछ दूरी पर ही रखा हुआ था। बेड शीट भी सनी हुई थी। लग रहा था कि दम घुटने से उन्हें उल्टी भी हुई होगी।

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