मोटे हैं, तो गम है…

लखनऊ : कोरोना वायरस बुजुर्ग लोगों के लिए तो जानलेवा साबित ही हुआ है, युवा मरीजों के लिए भी खतरनाक है। लेकिन एक और बात जो रिसर्च में सामने आई है वह काफी परेशान अकरने वाली है। अमेरिका में आठ हजार मरीजों पर हुए दो अध्ययनों से यह हकीकत सामने आई है कि अगर आप मोटापे के शिकार हैं, तो आपको कोरोना वायरस से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

रिसर्च में पाया गया कि कैंसर, फेफड़े या हृदय रोग के मरीजों के मुकाबले मोटापे से ग्रस्त कोरोना के मरीजों की हालत तेजी से बिगड़ी। वायरस के सामान्य मरीजों के मुकाबले मोटापे से ग्रस्त रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराने की दोगुनी आवश्यकता पड़ी। मोटापे के शिकार ऐसे ज्यादातर मरीजों को वेंटीलेटर पर रखा गया।

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के ग्रासमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन ने पहले अध्ययन में 4103 बुजुर्ग मरीजों का अध्ययन किया, जिसमें 46 फीसदी मरीज 65 वर्ष से ज्यादा उम्र के मिले। दूसरे अध्ययन में लैंगन हेल्थ संस्थान ने 60 साल से कम उम्र के 3615 मरीजों की पड़ताल की। इसमें पाया गया कि 30 फीसदी से ज्यादा बीएमआई वाले यानी मोटे मरीजों की हालत तेजी से बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती *कराने का साथ वेंटीलेटर का सहारा लेना पड़ा।

शोधकर्ताओं का कहना है कि मोटापे से ग्रस्त मरीजों में संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा होता है, क्योंकि उनकी प्रतिरोधी क्षमता की ज्यादातर ताकत शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी से होने वाले प्रदाह की मरम्मत में ही लग जाती है। अमेरिका में बड़ी संख्या में मौतों की यह बड़ी वजह बनकर उभरी है। ये अध्ययन एक मार्च से दो अप्रैल के बीच हुए और क्लीनिकल इनफेक्शियस डिसीज जर्नल में प्रकाशित हुए।

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